श्री अटल सच्चियाय माताजी को अटल, मारोठिया एवं गोठणीवाल आदि खांप एवं नख वाले मानते हैं।
नागौर जिलान्तर्गत नागौर तहसील के ही शंखवास नामक गांव में माताजी का स्थान है। मन्दिर का निर्माण लगभग 1400 वर्ष प्राचीन बताया गया है। किन्तु कालान्तर में मूर्ति के चोरी हो जाने से हैदराबाद के श्री कन्हैयालालजी अटल ने लगभग 50 वर्ष पूर्व दूसरी मूर्ति स्थापित की है जो आकर्षक व दर्शनीय है । पूर्व समय में स्थापित मूर्ति पीले पत्थर की थी।
इसी मन्दिर में माहेश्वरी समाज की सहमति से ही कुछ वर्षों पूर्व सच्चियाय माताजी की ही एक अन्य मूर्ति सांखला राजपूतों ने भी स्थापित की है राजपूतों में सांखला व पंवार इन्हें बड़ी शृद्धा से पूजते हैं। मध्यप्रदेश व राजस्थान में सांखला, पंवार (राजपूत) अपने जात जडूला कर्म के लिए यहीं आते हैं। गांव में 5 परिवार अटल के व 16 परिवार हेड़ा खांप के वर्तमान में निवासित हैं।
इतिहास झरोखा:
मुख्य मन्दिर के चारों और की दिवालों पर विभिन्न देवी-देवताओं की भीत्ति प्रतिमाएं अभी भी अंकित हैं किन्तु ऐतिहासिक तथ्य यह है कि लगभग समस्त भीत्ति प्रतिमाओं को आततायी मुगल शासक औरंगजेब के सेनापति मीरखाँ ने खण्डित कर अपूजनीय बना दिया है। मंदिर तंवर राजपूतों का बनाया हुआ है।
मन्दिर वर्षों से अन्य समाज के आधिपत्य में था जो लम्बी कानूनी लड़ाई के पश्चात २००७ में समाज को सौंपा जा चुका है। मन्दिर से ही सटा हुआ लगभग 4000 स्क्वेयर फीट का माताजी का पोल नामक परिसर भी इसी अधिपत्य का हिस्सा है। मन्दिर के एक अन्य भाग में शीतला माता की प्रतिमा भी विराजित है। जहाँ सम्पूर्ण गांव वासी शीतला सप्तमी का पूजन सम्पन्न करते हैं।
पूजन एवं उत्सव:
मन्दिर में प्रतिदिन पूजन व आरती आदि नियुक्त महिला पुजारिन करती है जो बाहर से आने वाले परिवारों की भेंट व नगरवासियों के अन्नादि सहयोग पर आश्रित है। नवरात्रि में जागरण कर ग्रामवासी अपने परिवारों से मिष्ठान्न आदि लाकर भोग लगाते हैं । माहेश्वरी परिवार नित्य दर्शन के भी अभ्यस्त हैं।
कहाँ ठहरें:
छोटा स्थान होने के बावजूद सर्व सुविधायुक्त माहेश्वरी भवन एवं कलंत्री भवन दो स्थानों के अतिरिक्त स्थानीय निवासियों के लम्बे- चौड़े आवास भी हैं। दोनों भवनों में वर्तमान में निजी सेकण्डरी स्तरीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं।
प्रमुख शहरों से दूरी:
मारवाड़ मूण्डवा– 22 कि.मी.
मेड़ता सिटी- 40 कि.मी.
नागौर– 40 कि.मी.
खींमसर- 40 कि.मी.
जोधपुर- 105 कि.मी.
अजमेर- 155 कि.मी.
जयपुर- 360 कि.मी.
कैसे पहुंचें:
अजमेर से मेड़ता रोड़ (75 किमी.) आकर सीधे शंखवास (40 किमी.) सड़क मार्ग से भी जाया जा सकता है।
प्रमुख संपर्क बिन्दू:
श्री भीकमचन्दजी अटल-
ग्राम शंखवास तह. जिला नागौर (राज.)
फोन- ०१५८४-२८५००६, मो.- ०९४१३६८२६०६
प्रहलाद मण्डोवरा-
२३, तेजानगर, प्रखण्ड क्र.-एक
रतलाम ४५७००१
फोन- ०७४१२-२६५१५९ मो.- ०९३२९०३२३२०
विशेष- पृथक जानकारी के अभाव में अटलजन औसियाँ ही जाते थे किन्तु अब जानकारी प्राप्त होने पर दूर-दूर से अटल बन्धु शंखवास ही पधारते हैं।














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