बाईक से बनाया पहाड़ी चढ़ाई का कीर्तिमान

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इंदौर। लगन, जज्बा और साहस साथ-साथ हो तो कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं है और इसी बात को सार्थक कर दिखाया इंदौर के दंपत्ति योगेश और हेमा नागौरी ने। उन्होंने बाइक से विश्व की सबसे ऊंची मोटरेबल रोड (वाहन जाने योग्य) खारदुंगला दर्रे को अपनी मंजिल बनाया। उन्होंने विपरीत मौसम, सर्द हवा, निम्नतम तापमान, स्नो फॉल आदि कई बाधाओं को पार करते हुए खारदुगला (17982 फीट) पर इंदौर का परचम लहराया।

ज्ञातव्य है कि खारदुंगला लेह लद्दाख क्षेत्र का सर्वाधिक ऊंचाई वाला क्षेत्र है, जो कि कई बाईकर्स के आकर्षण का केंद्र है। इसी क्षेत्र में चांगला दर्रा (17586 फीट ऊँचाई) जो कि विश्व की दूसरी सबसे ऊंची मोटरेबल रोड है वह भी बाईकर्स के आकर्षण का केंद्र है, इस क्षेत्र में आने वाले बाईकर इन्ही दोनों ऊंचाइयों को पार करना अपनी सफलता मानते हैं और यही सफलता नागोरी दंपति ने चांगला दर्रे को बाइक से पार कर प्राप्त की।


वर्ष 1971 में भारत ने तुरतूक को अपने अधिकार में ले लिया था जो कि पाकिस्तान के पास था। तुरतूक (पाकिस्तान के कब्जे वाला गिलगीत और बाल्टिस्तान) सामरिक रूप से भारत के लिए महत्वपूर्ण था। वहां पहुंचकर देशभक्ति एक अलग ही अंदाज़ में हिलोरे लेने लगती है और मन बरबस ही सेना के प्रति नतमस्तक हो जाता है। तुरतुक भी बाइक से दोनों दंपति पहुंचे और तुरतुक से 12 किलोमीटर आगे थांग भी पहुंचे, जहाँ से पाकिस्तान की पोस्ट 200 मीटर की दूरी पर ही है और आँखों से दिखती है। तुरतुक को सियाचिन का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है।

इस यात्रा में दो विश्व प्रसिद्ध नदियां सिंधु और जास्कर का संगम भी देखने को मिला,जहाँ दो अलग-अलग रंगों की धाराएं नीली और हरी स्पष्ट देखने को मिलती हैं। सिंधु नदी भारतीय सभ्यता और संस्कृति को सदियों से पोषित करती रही है और आज भी इस क्षेत्र की जीवनदायिनी नदी के रूप में जानी जाती है। अपनी बाइक यात्रा के दौरान इस दंपत्ति ने मैग्नेटिक हिल को भी देखा जिस पर चुंबकीय आकर्षण के कारण वाहन स्वतः ही चलते हैं।

धार्मिक भावना के दृष्टिकोण से भी इस यात्रा में दो महत्वपूर्ण पढाव हैं, पहला पत्थर साहिब गुरुद्वारा जो कि सिख संप्रदाय की ही नहीं अपितु समस्त धर्म प्रेमियों के लिए आस्था का केंद्र है। वहां पहुंचकर एक अलग ही पवित्र भावना से मन प्रफुल्लित हो उठता है, गुरुद्वारे के दर्शन एवं लंगर प्रसादी से समस्त थकान गायब हो जाती है। दूसरा बौद्ध अनुयायियों का धार्मिक स्थल शांति स्तूप भी यात्रा का एक आकर्षण है, जो बौद्ध कालीन स्थापत्य कला का एक नायाब नमूना हैै।

इसके दर्शन से ही लेह के जीवन दर्शन को समझने में सहायता मिलती है। लेह में सैनिकों की शौर्य गाथाओं को बताता हॉल ऑफ फेम म्यूजियम भी बाइकर्स में सैनिकों के प्रति जोश भर देता है।


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