मकर मुद्रा दरअसल योग मुद्राओं का एक प्रकार है जिसका अभ्यास आपको मानसिक शांति देने का काम करता है। मकर मुद्रा (Makar Mudra) का अभ्यास करने से मानसिक शांति तो मिलती ही है और स्किन को बेहतर बनाने में भी ये मुद्रा फायदेमंद मानी जाती है। मकर मुद्रा के अभ्यास से आपके शरीर की ऊर्जा केंद्रित होती है और नकारात्मक भावनाओं को दूर करने में भी फायदा मिलता है।

आज के समय में तनाव लोगों की जिंदगी का अंग बन गया है। तनाव और चिंता जैसी मानसिक परेशानियों का खामियाजा हमारी स्किन को भी भुगतना पड़ता है। खानपान में गड़बड़ी, तनाव भरी जीवनशैली और पर्याप्त नींद न लेने के कारण आंखों के नीचे डार्क सर्कल की समस्या हो जाती है। डार्क सर्कल होने के कई कारण हो सकते हैं जिनमें खानपान में असंतुलन, जीवनशैली और धूप व प्रदूषण भी शामिल हो सकते हैं।
इस समस्या से निजात पाने के लिए लोग तमाम तरह के कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं जिससे तुरंत फायदा तो मिल जाता है लेकिन यह समस्या हमेशा के लिए दूर नहीं होती है। चेहरे पर डार्क सर्कल और स्किन का बेजान हो जाना जैसी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए आप योग का सहारा ले सकते हैं।
योग में कई ऐसी मुद्राएं हैं जिनके नियमित अभ्यास से इन समस्याओं को दूर करने में फायदा मिलता है। ऐसी ही एक योग मुद्रा है मकर मुद्रा। इसके नियमित अभ्यास से आंखों के नीचे काले घेरे यानी डार्क सर्कल्स की समस्या से छुटकारा बना सकते हैं और चेहरे की खोई हुई चमक दोबारा पा सकते हैं।
कैसे करें
दाएं हाथ को बाएं हाथ के नीचे तिरछा करके रखें। नीचे वाले हाथ के अंगूठे को ऊपर वाले हाथ की छोटी व अनामिका उंगलियों के बीच से निकालकर ऊपर वाले हाथ की हथेली के बीच लगा दें और बाएं हाथ (ऊपर वाले हाथ) की पृथ्वी मुद्रा बना लें अर्थात् अंगूठे व अनामिका उंगली के अग्रभाग को मिला लें। इसी प्रकार बायें हाथ को भी नीचे रखकर यह मुद्रा बनायें।
अवधि
5 से 10 मिनट के लिए, दिन में तीन बार दोनों हाथों से करें।
लाभ
- इस मुद्रा से कमजोरी दूर होती है।
- रक्त की कमी दूर होती है तथा ताकत, स्फूर्ति व उत्साह बढ़ता है।
- मकर को कहते हैं। मकर प्रायः सोया रहता है। परंतु जब वह जागता है तो उसमें गजब की शक्ति आ जाती है। इस मुद्रा का भी यही लाभ है। अवसाद, सुस्ती, असंतोष से निकलने के लिए इस मुद्रा का प्रयोग करें। तुरंत स्फूर्ति व उत्साह उत्पन्न होगा।
- आँखों के नीचे के काले घेरे दूर होते हैं। इस मुद्रा को लम्बे गहरे श्वासों के साथ करें तो और भी अधिक लाभ होगा।
- हथेली के मध्य में गुर्दे का केन्द्र होता है। जब नीचे वाले हाथ के अंगूठे से ऊपर वाली हथेली के गुर्दे के बिन्दु पर दबाव पड़ता है, तो गुर्दे स्वस्थ होते हैं। मूत्र रोग नहीं होतें तथा गुर्दों द्वारा शरीर की सारी गंदगी बाहर निकल जाती है।










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