नारी स्वास्थ्य का सबसे बड़ा शत्रु- स्तन कैंसर

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नारी जीवन की अपनी परेशानी व अपनी चुनौतियाँ भी हैं। इनमें से ही एक है, स्तन कैंसर। यह सम्भवत: महिलाओं में सबसे अधिक पायी जाने वाली सबसे खतरनाक बीमारी है। आईये जानें क्या है यह और इससे कैसे बचें?

dr mangal rathi

स्तन कैंसर वह कैंसर है जो स्तन कोशिकाओं में विकसित होता है और स्तनों की कोशिकाएं नियंत्रण के बाहर हो जाती हैं। स्तन के विभिन्न हिस्सों में स्तन कैंसर शुरू हो सकता है। स्तन कैंसर दुनिया के सबसे अधिक पाए जाने वाले कैंसर के रूप में फेफड़ों के कैंसर के आगे निकल गया है।

सौभाग्य से यह कैंसर बहुत ही इलाज योग्य है अगर इसका निदान जल्द हो गया हो और वह स्तन के बाहर न फैला हो तो। एक बार जब स्तन कैंसर फैलने लगता है तो वह अधिक जटिल हो जाता है। स्तन कैंसर से मरने वाली किसी भी महिला की संख्या 38 में से लगभग 1 है। चाहे आप बेटी, मां, बहन, दोस्त, सहकर्मी, डॉक्टर या रोगी हों, कैंसर किसी को भी प्रभावित कर सकता है।


क्या हैं इसके लक्षण

वैसे तो इसकी विशिष्ट जाँच अनिवार्य हैं, लेकिन इसे सामान्य रूप से कुछ लक्षणों से पहचाना जा सकता है। इनमें स्तन में गांठ का आना, स्तन के आकार में बदलाव, पूरे स्तन या स्तन के एक हिस्से में सूजन आना, निप्पल या स्तन की ऊपरी त्वचा का रंग बदलना, त्वचा पर एक लाल पपड़ीदार परत आना, त्वचा संतरे के छिलके की तरह दिखना, सुखी होना, स्तन में या निप्पल में दर्द होना, स्तन का दर्द मासिक धर्म के बाद भी रहना, निप्पल का अंदर की ओर मुड़ना, निप्पल पर खुजली होना, निप्पल से ब्लड डिस्चार्ज होना तथा बगल में गठान का होना आदि इनमें से कोई भी लक्षण स्तन कैंसर के साथ अन्य बीमारी के भी हो सकते हैं। आपको कुछ महसूस होने पर तुरंत एक्सपर्ट डॉक्टर से जांच कराए।


क्या हैं इसके सामान्य कारण

50 से अधिक उम्र की महिलाओं में इसका प्रमाण ज्यादा होता है। यह पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक प्रमाण में होती है। इसका कारण कई बार अनुवांशिकता भी है। 12 साल की उम्र के पहले माहवारी आना, रजोनिवृत्ति की उम्र बढ़ना, 30 साल की उम्र के बाद पहला बच्चा होना, कभी भी गर्भवती न रहना, स्तनपान न कराना, पहले एक स्तन में कैंसर हुआ होना तथा मोटापा आदि इसके प्रमुख कारण हैं।

इसके साथ ही भोजन में पौष्टिक तत्वों का अभाव, घने स्तन का होना, रजोनिवृत्ति के दरमियान हार्मोन की दवाइयों का प्रयोग, लम्बे समय तक गर्भनिरोधक दवाइयों का प्रयोग, शराब और धूम्रपान का सेवन आदि कारक स्तन कैंसर को निमंत्रण दे सकते हैं।


क्या है इसका उपचार

यदि खुद के हाथ से ब्रेस्ट में गठान महसूस हो तो चिकित्सकों को दिखाकर मैमोग्राफी, अल्ट्रासोनोग्राफी, एम आर आई, फाइन नीडल एस्पिरेशन साइटोलॉजी, बायोप्सी आदि जांच करवाऐं।

इन जांच द्वारा स्तन कैंसर का निदान किया जाता है। स्तन कैंसर का चरण कितना दूर तक फैला है और टयूमर का आकार कितना बड़ा है, उस पर ट्रीटमेंट निर्भर रहती है। इसमें रेडियोथैरेपी, कीमोथेरेपी, हार्मोनल थेरेपी व दवाइयों से स्तन कैंसर का इलाज होता है।


बचाव के लिये सतर्कता जरूरी

स्तन कैंसर को रोकने का कोई तरीका नहीं है मगर जीवन शैली के कुछ बदलाव स्तन कैंसर के जोखिम के साथ-साथ अन्य बीमारियों को भी कम कर सकते हैं। नियमित स्तन कैंसर की जांच करवाऐं। स्वयं को भी हर महीने एक फिक्स दिन कांच के सामने खड़े होकर स्तन के आकार का व गोलाई का निरीक्षण करना है। साथ में अपनी हथेलिंयों को दोनों स्तन पर घुमाना है, ताकी गठान का पता लगे।

जिनको कैंसर की पारिवारिक हिस्ट्री है, उन्हें उम्र के 30 साल से ही ख्याल रखना जरूरी है। भोजन में सब्जियों और फलों का उपयोग ज्यादा से ज्यादा करें। भोजन में नियमितता रखें। नियमित रूप से व्यायाम करें। स्वस्थ वजन रखें। नियमित मेडिटेशन व योगासन करें। जिंदगी सकारात्मक तरीके से जिऐं।

अपने आसपास नकारात्मक लोगों को ना रहने दें। हरदम खुश रहे। दुखों से घिरे ना रहे। सदा हंसते रहें और दूसरों को भी हंसाते रहें। निसर्ग से प्यार करें। पर्यावरण की साफ सफाई के साथ स्वयं के शरीर की भी साफ सफाई का ध्यान रखें। शराब और धूम्रपान का सेवन ना करें। गर्भनिरोधक गोलियां और हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी अपने चिकित्सक की सलाह से ही लें। कम से कम 1 साल तक बच्चे को स्तनपान कराएं।


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