व्यवसायी तन में मानवसेवी मन- रमाकांत बाल्दी
व्यवसायी तन व मानवसेवी मन का संगम माहेश्वरी समाज की विशेषता रही है। इसी का परिणाम विभिन्न सेवा प्रकल्पों के रूप में नजर आता...
समाज सेवा के “गौरव”- माणकचंद होलानी
समाज की सेवा के लिये किसी पद की भी आवश्यकता नहीं होती। बस जरूरत होती है, तो दृढ़ इच्छा शक्ति की। इन्हीं पंक्तियों को...
125 दंडवती परिक्रमा का बनाया कीर्तिमान- मनमोहन राठी
वैसे तो गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा केवल 21 कि.मी. की है, लेकिन इसे दंडवत रूप में अर्थात् लोट-लोटकर करने के कारण यह अत्यंत कठिन...
निःस्वार्थ समाजसेवी- विजय कुमार माहेश्वरी
उम्र बढ़ी लेकिन उनका समाजसेवा का जज्बा वही रहा। आज उम्र के 77वें पड़ाव पर भी कई समाजसेवी संस्थाओं में सेवा दे रहे हैं...
चिकित्सा क्षेत्र में विशेषता हासिल करती- डॉ ईरा सारडा
माहेश्वरी समाज की प्रतिभाऐं विश्व के कोने-कोने में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही है। उनमें से ही एक है, विराटनगर (नेपाल) की बेटी...

