हाकिनी मुद्रा सभी उम्र के लोगों के शरीर को आंतरिक शांति प्रदान करने में भी लाभकारी है। यह स्मरण शक्ति बढ़ाती है। इससे तनाव, चिंता, अवसाद, नींद न आने की समस्या, नकारात्मक विचार, चिड़चिड़ापन आदि समस्याएं दूर हो जाती हैं।
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कैसे करें:
अपने दोनों हाथों को सामने की तरफ इस तरह रखें, जिससे हथेलियां आमने-सामने हों। इसके बाद धीरे-धीरे दोनों हाथों की उंगलियों के अग्रभाग को आपस में मिला लें। इस बीच अपनी निगाहें ऊपर की तरफ रखें।
इससे दोनों हाथों के पांचों तत्व आपस में मिल जाते हैं। आंखों को ऊपर की ओर तानें। श्वास भरते हुए अपनी जीभ के अग्रभाग को मसूड़ों के साथ मिलाएं और श्वास छोड़ते हुए जीभ वापिस अपनी स्थिति में ले जाएं। लंबी गहरी श्वास लें। दैनिक 10 मिनट इसे करना चाहिए।
लाभ:
- स्मरण के लिये यह मुद्रा बहुत लाभदायक है। इससे याददाश्त बढ़ती है। इस क्रिया से मस्तिष्क का दायां भाग प्रभाव में आता है और दाएं भाग में ही स्मरण की कोशिकाएं हैं।
- जब लम्बे गहरे श्वासों के साथ इस मुद्रा को करते हैं तो फेफड़े भी सुदृढ़ होते हैं। श्वसन तन्त्र ठीक रहता है।
- मस्तिष्क के दाएं भाग व बाएं भाग में सन्तुलन रहता है।
- यदि अचानक कोई वस्तु, नाम आदि याद नहीं आ रहा है, तो इस मुद्रा को बनाकर उस वस्तु का ध्यान करें।
- विद्यार्थियों के लिये बहुत ही लाभकारी मुद्रा है। इस से नए विचार आते हैं।
- यदि इस मुद्रा को त्रिबन्ध, महाबन्ध, (मूलबन्ध, उड्डियान बन्ध व जालन्धर बन्ध) लगाकर किया जाये तो मस्तिष्क की ऊर्जा बढ़ती है।
- यह मुद्रा आज्ञा चक्र को सक्रिय कर हमारे सारे क्रिया-कलापों पर नियंत्रण रखती है।
- यह मुद्रा मन को एकाग्र और तीक्ष्ण बनाएं रखती है।










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