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health measures for cold and cough

सर्दी-जुकाम से बचाव के आसान उपाय

ठंड का मौसम वैसे तो हेल्दी मौसम कहा जाता है, लेकिन इसमें थोड़ी सी लापरवाही स्वास्थ्य पर भारी पड़ जाती है। इसी का नतीजा होता है, सर्दी-जुकाम। ये समस्या कई लोगों को लम्बे समय तक या स्थायी भी रहती है। आईये जानें इसके आसान उपाय।

goverdhan das binnani

सर्दियों का मौसम चल रहा है और इसका असर हमारी दिनचर्या पर पड़ना स्वाभाविक है। सर्दियों में तो भूख बढ़ जाती है। अतः बदले हुये मौसम में खान-पान में भी सतर्कता अति आवश्यक है। कैसा भी मौसम हो बाजार में तैयार किये हुये खाने वाले पदार्थ जिसे हम फास्ट फूड कहते हैं, से बचना चाहिये।

ध्यान रखें जरा भी चूक से हमें सर्दी-जुकाम से ग्रसित होने में देर नहीं लगेगी। इसके अलावा खांसी हो जाए तो कामकाज में मन लगता ही नहीं। अतः इस बदलते मौसम में असावधानी के चलते हम कफ से भी परेशान हो जाते हैं। आयुर्वेद से सर्दी-जुकाम, कफ एवं खाँसी वगैरह से आसानी से आराम पाया जा सकता है। आयुर्वेद में थोड़ा समय अवश्य ज्यादा लगता है लेकिन ईलाज एकदम कारगर होता है।


  • सुबह तथा रात्रि को सोते वक्त हल्दी-नमक वाले ताजे भुने हुए एक मुट्ठी चने खायें, किंतु खाने के बाद कोई भी पेय पदार्थ, यहाँ तक कि पानी भी न पियें। भोजन में घी, दूध, शक्कर, गुड़ एवं खटाई तथा फलों का सेवन बन्द कर दें। सर्दी-खांसी वाले स्थायी मरीजों के लिए यह सस्ता प्रयोग है।
  • भोजन के पश्चात हल्दी-नमक वाली भुनी हुई अजवायन को मुखवास के रूप में नित्य सेवन करने से सर्दी-खांसी में न केवल आराम मिलता है बल्कि लम्बे समय तक प्रयोग से खांसी मिट भी सकती है।
  • अजवाइन का धुआँ लेना चाहिए। मिठाई, खटाई एवं चिकनाईयुक्त चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • सर्दी-जुकाम अधिक होने पर नाक बन्द हो जाती है, सिर भी भारी हो जाता है और बहुत बेचैनी होती है। ऐसे समय में एक तपेली में पानी को खूब गरम करके उसमें थोड़ा दर्दशामक मलहम, नीलगिरि का तेल अथवा कपूर डालकर सिर व तपेली ढँक जाय ऐसा कोई मोटा कपड़ा या तौलिया ओढ़कर गरम पानी की भाप लें। ऐसा करने से कुछ ही मिनटों में लाभ होगा एवं सर्दी से राहत मिलेगी।
  • अजवाइन की पोटली से छाती की सेक करने से भी काफी राहत मिलती है। इसलिये सेंक करते रहना चाहिये।
  • सितोपलादि चूर्ण बढ़े हुए पित्त को शान्त करते हुये कफ को छाँटता है अर्थात गलाने में सहायक होता है। अन्न पर रुचि उत्पन्न करता है और जठराग्नि को तेज भी करता है। साथ ही पाचक रस को उत्तेजित कर भोजन पचाने में कारगर भूमिका निभाता है। इसलिये इस चूर्ण को भी लम्बे समय तक लिया जा सकता है।