हिंदुओं रो प्रमुख त्योंहार होली…मौज-मस्ती और मनोरंजन रो त्योंहार… यों त्योहार ही एक ऐड़ो त्योंहार है जो सब दुःख, उलझन संताप ने भुला ने प्रेम और भाईचारे री भावना उत्पन करें। फाल्गुन मास री पूर्णिमा ही नहीं बल्कि पुरो मार्च महीनों ही होली रे रंगों सूं सरोबार हुवें। इण त्योंहार मनावण रे पिछे एक पौराणिक कथा भी प्रसिद्ध है कि प्राचिन समय में हिरण्यकश्यप नामक असुर राजा तपस्या करने भगवान ब्रह्मा सूं वरदान प्राप्त करने मृत्यु -लोक माथे विजय हासिल करली थी। अभिमान सूँ वह आपने अजेय समझण लाग ग्यों। जनता भय सूं ईश्वर री नहीं हिरण्यकश्यप री पूजा करती । हिरण्यकश्यप रो पुत्र प्रह्लाद री ईश्वर रे प्रति अटूट आस्था थी। हिरण्यकश्यप प्रह्लाद री ईश्वरीय भक्ति खंडित करण रा कई उपाय किया पर सफल नहीं हुयो जण वह बहन होलिका ने आदेश दियो कि प्रह्लाद ने गोदी में लेने जलती हुई आग रे लपेटों में बैठ जावे क्योंकि होलिका ने आग में न जलण रो वरदान थो। परन्तु प्रह्लाद रे दृढ़ – निश्चय रे चलते उनो बाल भी बाँकों नहीं हुयो स्वयं होलिका जल ने राख हुगयीं।
या कहानी बुराई पर अच्छाई री जीत बतावे इण वास्ते लोग नाचरंग करता हुआ होली रा गीत गावे और रंगों सूं इण त्योंहार ने मनावे। इण दिन रंग बिरंगा चेहरा पूरे वातावरण ने रंगीन कर देवे। गांवों में लट्ठ मार होली हुवे। नाचरंग करते हुए होली ने ख़ूब आनन्द सूं मनावे।
पेला त्योंहार सब आपस मे मिळने मनावता पर मोबाइल में आजकल फेसबुक, ट्विटर,व्हाटसअप सूं लोग सिमटता जा रिया है त्योंहार भी हुक्म अब डिजिटल हूँ ग्या है। त्योंहार में बणन वाली मिठाई और भुजिया लोग खावे कम शेयर ज्यादा करें पांच सौ ग्राम मिठाई भी बणाई फ़ोटो खींच ने शेयर करने पांच हज़ार लोगा तक पंहुचा देई। अब तो होली रा रंग मोबाइल में उड़ता ज्यादा नजर आवे। त्योंहार री त्योरियां चढ़न सूं पेला मोबाइल में निभ जावे। हफ़्तों पेला बधाई संदेश भेजना चालू हूँ जावे।
सही कहूँ हुक्म बेचारों मोबाइल रो बधाई संदेश सूं हाज़मों हूँ जावे और फोन हेंग हुवण लाग जावे त्योंहार सूं पेला ही डिलीट री नौबत आ जावे । अबे सब होली री हुड़दंग नहीं मचावे। चेहरे री स्किन खराब हुवण रो डर सतावें जिण चेहरे पर ब्यूटी पार्लर में हज़ारों रुपया देने सजावे भला दो रुपया री गुलाल सूं चेहरों कीकर खराब करें। होली ही तो है बिना गुलाल ही गुल खिला देवे। फेसबुक व्हाट्सएप द्वारा ही एक दूसरे ने रंग लगा देवे। यों है आज रे युग रो डिजिटल त्योंहार। पर हुक्म वर्चुअल दुनियां में आभास है अहसास नहीं । प्रेम है पर आनन्द नहीं। कुछ क्षण ही सही इंसानों रे साथे रेने जिको सुख है वो फ़ोटो में नहीं.. विचार करिजो सा कि इण बार त्यौहार किकर मनावा।
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