यात्रा शब्द सुनते ही मन ऊर्जा, उत्साह, उपलब्धि, उल्लास से भर जाता है। खुशनुमा अहसास की ये प्रक्रिया नासमझी या अनभिज्ञता के समय से ही आनंदित करती रहती है।

याद कीजिये बचपन के वो दिन तैयार होकर पांव में चप्पल डाल हरदम दरवाजे पर खड़े रहना। आते-जाते घर के किसी सदस्य का साइकिल, स्कूटर या कार में एक चक्कर करवा देना और हमें खुशियों का खजाना मिल जाना। पहली, दूसरी कक्षा में स्कूल पिकनिक की वो महान यात्रा। तारीख मालूम होने के दिन से गोली, चॉकलेट, बिस्किट की लिस्ट बनाना, यूनिफार्म को धुलवाना, कलफ प्रेस करवाना, जूते चमकाना। खुशी के वो पल कितने सजीले थे जब टूर के लिये अपने माता-पिता को ही नहीं, संगी-साथियों के माता-पिता को तरह-तरह के वायदे कर मनाया करते थे। यात्रा तक यात्रा की तैयारी करते थे और साल दो साल दूसरी यात्रा तक रोज उसके किस्से दोहराया करते थे।
किशोरावस्था की दहलीज पर ये यात्राएं कुछ अलग रूप लेने लगीं। पढ़ाई या सहेली की मां की बीमारी का बहाना बना सखियों के संग एक सखी के घर एक रात या कुछ घंटे बिताना, मन में उठी ढेर सारी शंकाओं पर जी भरकर बातें करना। घबराना और घबराना, नासमझ लोगों का मिलकर समझदारी भरा निर्णय लेना और जीवनभर उस पर कायम करने की कसमें खाना। कुछ की जिंदगी में बड़ी जद्दोजहद के बाद एक और यात्रा भी शामिल होती है-पढ़ाई के लिये दूर देश जाने की यात्रा। पूरी जिंदगी इस यात्रा की याद रोमांचित करती रहती है। ये यात्रा वो यात्रा है, जहां पहले पंख फड़फड़ाते हैं और फिर पंखों में उड़ान भरती है। दाना चुगने वाली नन्हीं चिड़िया आसमान नापने के लंबे-लंबे सपने संजोने लगती है। फिर आती है, वो चिर-प्रतिक्षित यात्रा जिसके बारे में थोड़े से सयाने होने ही कभी प्यार से, कभी उपकार से, कभी दुत्कार से, कभी अधिकार से, कभी उलहाने से हम सबने सुना भी है और सुनाया भी है। हां वहीं पराये घर की यात्रा पराये घर से उसे अपना घर बनाने वाली बड़ी लंबी यात्रा। पराये घर से उसे अपना घर बनाने वाली बड़ी लंबी यात्रा।
एक ऐसी यात्रा जो कब यात्रा से रोजमर्रा बन जाती है पता ही नहीं चलता। यात्री पड़ाव पर पड़ाव रुकता है, ठहरता है और फिर यात्रा को ही जीवन मानकर उसमें लिप्त हो जाता है। सोचने लगता है कि यात्रा खत्म हुई। बस अब तो इसे संजोना है, इसे ही जीना है, इसमें ही रमना है, इसमें ही रहना है। यात्रा नहीं, यह ठहराव ही जीवन है, सफलता है, संतुष्टि है, सम्पन्नता है, सर्वव्याप्त है। वह आ गई है। तेरा ही इंतजार था, चल चलते हैं खुशनुमा के साथ निकल पड़ेंगे-यात्रा पर।










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