‘‘रामनाम’’ की कला गुरु- कविता डागा

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वास्तव में देखा जाऐ तो ‘‘रामनाम लेखन’’ एक आध्यात्मिक उपासना है, लेकिन इसकी इसी रूप में हर पीढ़ी तक पहुँच आसान नहीं होती। इसे एक कला का रोचक रूप देकर हर उम्र के लोगों तक ‘‘राम नाम’’ की आध्यात्मिक अनुभूति पहुँचाने का कार्य कर रही है, कोलकाता निवासी रामनाम कलागुरु कविता डागा।

कोलकाता निवासी कविता डागा की पहचान वर्तमान में ‘‘रामनाम लेखन कला’’ की कलागुरु के रूप में न सिर्फ क्षेत्र बल्कि सम्पूर्ण प्रदेश में है और धीरे-धीरे यह प्रदेश की सीमाओं को भी लांघ रही है। मात्र गत वर्ष 2019 से उन्होंने इसकी नि:शुल्क कार्यशाला आयोजित करने की शुरुआत की।

इतनी अल्पावधि में अब तक वे 35 से अधिक राम राम लेखन की कार्य शाला विशेषकर कोलकाता के साथ पुरूलिया, राँची, जमशेदपुर, बीकानेर, नोखा, झाडसुगडा, सम्बलपुर, रायपुर, पिपरिया, जबलपुर, अकोला, अमरावती, नागपुर आदि शहरों में आयोजित कर चुकी हैं।

आगामी कार्य शाला चेन्नई, ईरोड, कोयम्बंटुर, सलेम और मदुरै में होने जा रही है। उनकी इस राम लेखन कार्य शाला में बच्चे ही नहीं बड़े भी उत्साहित रहते है। फ़ेसबुक पेज से भी जुड़कर इस कला को लोग अपना रहे है। आपको आश्चर्य होगा कि अमेरिका में रहने वाले कुछ भारतीय बच्चे भी इस कला से जुड़ गये है। गत दिनों दक्षिण भारत में भी चैन्नई, ईरोड, सलेम, मदुरै व पंडिचेरी में उनकी कार्यशाला का आयोजन हो चुका है।

कविता डागा बनाती हैं राम नाम से चित्र:

जीवन में जो कुछ भी अविस्मरणीय कार्य होते है, इन सब कें पीछे ईश्वरीय प्रेरणा ही सर्वविदित हैं। ऐसा ही श्रीमती डागा के साथ हुआ है, जिन्होंने आदिकाल से चले आ रहे राम लेखन को एक कला कें रुप में रुपान्तरित किया हैं। इस कला में न तो बिंदु, न हीं कोई लाईन का प्रयोग किया गया हैं।

इस लेखन कला की विशेषता यह है कि इसके आकार मे पूर्ण रुप से सिर्फ राम एवं राम शब्दों का प्रयोग किया गया हैं। रामनाम हमें स्वार्थ से परमार्थ की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देता हैं। आज की सदी मे मन की एकाग्रता को जोड़ने की ताकत इस रामनाम लेखन कला मे हैं।

इस कला के प्रकाश से हम न केवल समाज मे बल्कि विश्व मे भी इसे योग की तरह लोकप्रिय बना सकते हैं। श्रीमती डागा ने अपने जीवन के 49 वर्ष तक कोई चित्र नहीं बनाया। लेकिन विगत तीन वर्ष से वो राम लेखन चित्र कला बना रही हैं और अबतक वो राम लेखन से 51 से ज्यादा चित्र बना चुकी है।

ईश्वरीय प्रेरणा से मिली कला:

श्रीमती कविता डागा का जन्म महाराष्ट्र के अकोला जिला के अकोट में सन् 1968 में हुआ। इनका विवाह पुरुलिया निवासी कोलकाता प्रवासी राजेश कुमार डागा के साथ हुआ, जो पेशे से चार्टड एकाउंटेंट हैं। इनके एकमात्र पुत्र कुमारवर्धनम डागा आईआईटी, खड़गपुर से ग्रेजुएशन कर विज्ञान की दुनिया से जुड़े हुए है। ऐसे में कला की कल्पना ही नहीं की जा सकती।

यह ईश्वरीय प्रेरणा ही कही जा सकती है। वैसे वे इस कला की प्रणेता अपनी सासूजी और माताजी को मानती है। उनकी सासूजी जीवन पर्यन्त रोज़ नियमित रूप से राम राम का एक पन्ना लिखती थी। वर्ष 2017 में सासूजी के देहांत होने पर उनकी बैठक में श्रीमती डागा ने पहली बार रामराम का पन्ना लिखना शुरू किया, किन्तु इनका मन बिल्कुल नहीं लगता था।

इसी बैचेनी में उसी वक्त से राम – राम से छोटे छोटे चित्र बनाने लगी। कविता जी अपनी इस ईश्वरीय आस्था में लगन का योगदान अपनी माताजी को भी देती है जो विगत 20 वर्ष से ऋषिकेश के गीता भवन में स्थायी रुप से प्रवास कर आध्यात्मिक साधना में गतिशील हैं।

ईश्वर ने जो लगन लगाई वो आज हम सबके सामने रामराम आर्टस के रुप में प्रस्तुत है। इस कला के प्रति लोगों का स्नेह देखकर पुत्र एंव पति ने उन्हें रामलेखन कला को लोगों को सिखाने के लिये प्रोत्साहित किया।


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