सेवा के लिये “डॉक्टरेट” से सम्मानित- रमेश पेड़ीवाल

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समाजसेवा के क्षेत्र में गंगटोक (सिक्किम) निवासी रमेश पेड़ीवाल एक ऐसा नाम है, जिनकी सेवा भावना के सामने सिक्किम राज्य में सरकार भी नतमस्तक है। इतना ही नही विश्व मानवाधिकार सुरक्षा आयोग जैसे संगठन ने भी उनकी इसी सेवा का ‘‘मानद डॉक्टरेट’’ की उपाधि से सम्मान किया है।

कानूनी शिक्षा मं स्वर्ण पदक हासिल के रूप में भी अपनी पहचान रखने वाले गंगटोक (सिक्किम) निवासी 64 वर्षीय रमेश पेड़ीवाल की पहचान एक ऐसे समाजसेवी के रूप में भी है, जो गत 50 वर्षों से अपनी किशोरावस्था से ही समाजसेवा के क्षेत्र में किसी न किसी रूप में अपनी सेवा देते ही रहे हैं।

जैसे-जैसे आयु की परिपक्वावस्था की ओर पहुँचते गये, वैसे-वैसे उनकी यह सेवा भावना वृहद वटवृक्ष के रूप में विस्तारित होती ही चली गई। वर्तमान में कई स्वयं सेवी संस्थाऐं तो उनकी सेवा से पोषित हो रही है, साथ ही उनकी इन सेवाओं का सम्मान करते हुए सिक्किम सरकार अभी तक कई सरकारी समितियों में उन्हें पदेन सदस्य भी मनोनीत कर चुकी है।


कई सेवा संस्थाओं की स्थापना

स्व. श्री महावीर प्रसाद पेड़ीवाल के यहाँ जन्मे 64 वर्षीय रमेश पेड़ीवाल ने अपनी स्कूल की शिक्षा गंगटोक सरकारी स्कूल में पूरी करने के बाद कॉलेज की पढ़ाई दिल्ली से पूर्ण की। इसमें वकालत की पढ़ाई में स्वर्ण पदक प्राप्त कर सामाजिक जीवन की शुरुआत गंगटोक में सामाजिक कार्यो से की तथा अपनी लगन व मेहनत से अपने नाम को शिखर पर पहुंचाया।

इस क्षेत्र में आज से 50 साल पूर्व गंगटोक में सार्वजनिक संस्था की स्थापना के साथ समाज सेवा का आगाज कर बहुत सी सामाजिक संस्थाओं में अपनी रुचि दिखाते हुए निरन्तर आगे बढ़ते ही गए। इनमें प्रमुख राज्य सिविल डिफेंस, सिक्किम चैंबर ऑफ कॉमर्स, सिक्किम दिव्यांग सहायता समिति, सिक्किम केमिस्ट एसोसिएशन, राज्य फार्मेसी कॉउन्सिल, सिक्किम माहेश्वरी सभा, सिक्किम कल्याण आश्रम, सिक्किम ब्लाइंड एसोसिएशन, श्री हनुमान टोक मंदिर समिति, एकल श्री हरि सत्संग समिति आदि शामिल हैं।

कोरोना काल के कठिन समय मे इन्होंने राज्य के कोने कोने तक जरूरत मुताबिक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का एक बड़ा काम किया था एवं साथी हाथ बढ़ाना जैसी संस्थाओं से जुड़कर देशव्यापी सहायतार्थ कार्य किया था, जिसके कारण इनको कोरोना योद्धा से सम्मानित भी किया गया था।


सेवा ने दिलाया सम्मान

गत वर्षो में श्री पेड़ीवाल को उनकी सेवा भावना के लिये सिविल डिफेंस मैडल, मारवाड़ी नागरिक सम्मान, एलुमनी सम्मान, कोरोना योद्धा सम्मान सहित अनेको संस्थान द्वारा सम्मानित किया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर अखिल भारतीय दवा विक्रेता संघ, अखिल भारतीय माहेश्वरी सभा, अखिल भारतीय श्री हरि सत्संग समिति एवं भारतीय संस्कृति सभा में भी उच्च कोटि का योगदान दिया है।

सिक्किम दिव्यांग सहायता समिति में करीब 22 साल तक दिव्यांगों के सर्वांगीण विकास, शिक्षण पूर्वाधार, आत्मनिर्भर जीवन के सूत्र आदि पर इनका बहुत ही सराहनीय प्रयास रहा। अभी हाल ही में इन्होंने अपने पैतृक गांव अनूपशहर (राजस्थान) में एक शानदार धर्मशाला का निर्माण कराया है और गत फरवरी माह में ही गांव को समर्पित किया है, जिससे गांव की वर्षो की जरूरत पूर्ण हुई हैं।

इसके साथ ही गांव की गौशाला के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। श्री पेड़ीवाल एक सफल वक्ता, कवि, लेखक, व्यापारी होते हुए धार्मिक, सामाजिक, व्यापारिक एवं सांस्कृतिक रुचि के धनी भी हैं। उनकी दीर्घकालीन सेवाओं का सम्म्मान करते हुए विश्व मानवाधिकार सुरक्षा आयोग द्वारा श्री पेड़ीवाल को ‘‘मानद डॉक्टरेट’’ की उपाधि से भी अलंकृत किया गया है।


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