हिन्दू पंचांग के अनुसार श्रावण साल का पांचवां महीना है। इस महीने से वर्षा ऋतु का प्रारंभ हो जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार श्रावण मास भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे उत्तम महीना है। ऐसा कहा जाता है कि इस महीने में भगवान शिव का माता पार्वती से पुनः मिलन हुआ था इसी वजह से भोलेनाथ को यह महीना बेहद प्रिय है।
श्रावण का महीना वो महीना है जिसमें सूर्य की तपिश धरती पर कम होने लगती है और बारिश की फुहार पेड़-पौधों में नई जान डाल देती है। श्रावण के इस महीने में दूर-दूर से शिवभक्त आकर गंगाजल अर्पित करते हैं।

इस वर्ष श्रावण मास की शुरुआत 4 जुलाई मंगलवार से हो रही है। इस बार श्रावण मास 59 दिनों का है। श्रावण मास 4 जुलाई से शुरू होकर 31 अगस्त को समाप्त होगा। 19 वर्षों बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बना है कि अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) होने के कारण श्रावण के दो महिने हैं। अधिकमास का प्रारंभ 18 जुलाई मंगलवार से होकर 16 अगस्त बुधवार को समाप्त होगा। इस श्रावण मास में 8 सोमवार व्रत और 9 मंगला गौरी व्रत हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार सूर्य और चंद्रमा के आपसी संबंधों की वजह से हर तीसरे साल एक महिना ज्यादा होता है। जिसे अधिकमास कहते हैं।
क्या है पौराणिक महत्व
एक कथा के अनुसार श्रावण माह में ही समुद्र मंथन किया था और जब इस मंथन के दौरान विष निकला तो सृष्टि की रक्षा के लिए महादेवजी ने इसका पान किया और अपने कंठ में उसे रोक लिया, जिससे उनके शरीर में गर्मी बढ़ने लगी। तब उस विष के प्रभाव को कम करने के लिये सभी देवी-देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया। इस कारण से श्रावण मास में शिवजी को जल अर्पित करने का विशेष महत्व माना गया है।
क्या है इसका महत्व
इसमें धर्म करना, दान-पुण्य करना, कथा करवाना व सुनना, धार्मिक यात्राएं करना व गुरु और विष्णु की पूजा करना चाहिए। उज्जैन में तो 84 महादेव की पूजा व नौ नारायण सागर आदि की पूजा का बहुत ही महत्व है। श्रावण माह में कुंआरी कन्यायें अच्छे वर के लिए भगवान शिव की पूजा करती हैं और विवाहित महिलायें भी अपने पति की लंबी आयु के लिये व्रत पूजा करती है। श्रावण महीने में पड़ने वाली शिवरात्री के अलावा हरियाली तीज, नागपंचमी, रक्षाबंधन जैसे त्यौहार इस महीने के महत्व को और बढ़ा देते हैं।
श्रावण माह में क्या करें
- शास्त्रों के अनुसार श्रावण माह में भगवान शिव की उपासना के साथ जलाभिषेक करना चाहिए।
- श्रावण माह में शिवलिंग पर धतूरा और भांग अर्पित करने से मनचाहे फल की प्राप्ति होती है।
- श्रावण माह में दूध का दान करना शुभ माना जाता है।
- ऐसा माना जाता है कि श्रावण माह में अगर घर के दरवाजे पर नंदी (वृषभ) आ जाए तो उसे कुछ खाने को दें।
- अच्छे स्वास्थ्य के लिए इस महीने में बेल (लता) पर उगने वाली सब्जी जैसे लौकी, तुरई, टमाटर आदि का सेवन करें।
श्रावण में क्या न करें
- श्रावण में दूध सेवन न करें।
- हरी पत्ते वाली सब्जी और बैगन, मूली का सेवन न करें।
- शिवजी पर केतकी का फूल अर्पित न करें।










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