वटवृक्ष वह होता है, जो कई लोगों को अपनी शीतल छाया प्रदान कर नवजीवन देता है। तराना निवासी वरिष्ठ समाजसेवी ओमप्रकाश पलोड़ भी एक ऐसे ही समाजसेवी हैं, जो 75 वर्ष की अवस्था में भी कई संस्थाओं के माध्यम से अपनी सेवा भावना को साकार कर रहे हैं।
तराना जिला उज्जैन (मप्र) में समाज के वरिष्ठ ओमप्रकाश पलौड़ की पहचान जितनी एक सफल किराना, कृषि दवाई तथा खाद-बीज विक्रेता के रूप में है, उससे अधिक एक समाजसेवी के रूप में है।
श्री ओमप्रकाश पलोड़ अपनी व्यावसायिक यात्रा में अत्यंत व्यस्त रहे हैं, इसके बावजूद उनकी समाजसेवा की यात्रा भी सतत चलती रही। वर्तमान में वे समाज की भावी पीढ़ी में संस्कार स्थापित करवाने का प्रयास कर रहे हैं।
श्री पलोड़ का कहना है कि आज का युवा उच्च शिक्षा ग्रहण कर अपने संस्कारों से दूर होता जा रहा है। यही कारण है कि वह आज जल्द ही अपने मार्ग से भटक रहा है।
वास्तव में अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने के साथ-साथ उन्हें समय-समय पर अपने घर में संस्कार भी ग्रहण करवाते रहना चाहिए।
पारिवारिक व्यवसाय को बनाया कॅरियर
श्री पलौड़ का जन्म 18 जुलाई 1945 में उज्जैन में हुआ। तराना के नयापुरा के निवासी श्री पलोड़ का परिवार प्रारंभ से ही आरएसएस से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने हायर सेकेंडरी तक शिक्षा ग्रहण की लेकिन परिवारिक जिम्मेदारी के चलते आप आगे पढ़ाई नहीं कर सके और पारिवारिक व्यवसाय संभालने लगे। आपकी सफलता में आपकी पत्नी का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

आप के 3 पुत्र हैं जो आपके व्यवसाय में हाथ बंटाते हैं और एक पुत्री हैं। आप अपने मार्गदर्शक अपने दादाजी एवं दादीजी तथा माताजी केशरबाई को मानते हैं।
परिवार ही सफलता की पहली सीढ़ी
श्री ओमप्रकाश पलोड़ का मानना है कि यदि परिवार सुखी रहे तो ही तमाम चीजें व्यवस्थित होंगी। सबको प्यार सम्मान एवं ईमानदारी की दृष्टि से देखो, जीवन बहुत ही सुखद लगेगा। श्री पलोड़ ने बताया कि उन्होंने प्रारंभ से ही संघर्षपूर्ण जीवन व्यतीत किया लेकिन कभी हार नहीं मानी।
आदान विक्रेता का व्यवसाय प्रारंभ किया। जिसके बाद पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा। आज यह स्थिति है कि तराना क्षेत्र में श्री पलोड़ का होलसेल और रिटेल का अच्छा व्यवसाय है।
श्री पलोड़ ने देश और विदेश में कई यात्राएं की जिसमें हांगकांग एवं मकाउ शामिल है। श्री पलोड़ को हांगकांग का अनुशासन बहुत अच्छा लगा।
कई संगठनों का किया प्रतिनिधित्व
तराना में वरिष्ठ समाजसेवी के रूप में पहचाने जाने वाले श्री पलोड़ ने विभिन्न संगठनों का प्रतिनिधित्व करते हुए कई उपलब्धि अर्जित की है। वर्ष 1973 में प्रथम बार जनसंघ से आप पार्षद चुने गए।
15 वर्षों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तहसील संघचालक रहे। उज्जैन जिला आदान विक्रेता संघ एसोसिएशन के संरक्षक सदस्य भी हैं एवं प्रदेश के आदान विक्रेता संघ के परामर्श दाता एवं अनुशासन समिति के सदस्य हैं। तराना किराना व्यापारी एवं आदान विक्रेता संघ के भी संरक्षक हैं।
सेवा के वृहद आयाम
लायंस क्लब तराना के संस्थापक सदस्य हैं। सरस्वती शिशु मंदिर के संस्थापक सदस्य है एवं अध्यक्ष पद पर भी अपनी सेवाएं निःस्वार्थ भाव से प्रदान कर चुके हैं।
आप डॉ. हेडगेवार सेवा न्यास के अध्यक्ष श्री गोवर्धननाथ मंदिर के ट्रस्टी भी हैं। खेलों में कई ऐसे अवॉर्ड मिले जो कि बहुत महत्वपूर्ण है। सामाजिक क्षेत्र में लायंस क्लब में भी कई बड़े अवॉर्ड से भी आप सम्मानित किए गए।
मास्टरमाइंड इंटरनेशनल स्कूल तराना द्वारा तराना रत्न की उपाधि से सम्मानित किए गए। आपने वर्ष 2004 में तराना में सोमयज्ञ के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आप उज्जैन माहेश्वरी समाज द्वारा सिंहस्थ 2016 में संचालित सेवा शिविर में संयोजक भी रहे हैं।









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