मत-सम्मत

Mat Sammat

क्या समाजसेवा के लिए जरुरी है पद?

अक्सर समाज में देखा जाता है कि जब समाजजन संगठन के किसी पद पर आसीन होते हैं, तब सक्रियता से…

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“दान-धर्म को प्रतिष्ठा-प्रदर्शन बनाना”- उचित अथवा अनुचित?

कहावत है दान-धर्म कुछ ऐसे किया जाए कि अगर एक हाथ दान-धर्म करे तो दूसरे हाथ को भी इसका भान…

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“आपदा में अवसर की तलाश’’- उचित अथवा अनुचित ?

कोरोना महामारी मृत्यु रूप में हाथ धोकर हमारी जान के पीछे पड़ गई है। इससे बचने के हर सम्भव स्वास्थ्य…

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‘ बेटी को ब्याहो और बहु को पढ़ाओ ‘ नारा कितना कारगर है?

आजकल बेटियों की उच्च शिक्षा और कैरियर बनाने में विवाह की उम्र बढ़ती जाती है जिससे विवाहोत्तर समस्याएं जन्म लेती…

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सगाई से विवाह का अंतराल- दाम्पत्य सम्बंध को मजबूत बनाता है या कमजोर ?

आज हमारे समाज में सगाई से विवाह तक का सफर भी नाजुकता से गुजरता है। जब तक विवाह ना हो…

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आवश्यकता है या दबाव- समाज के लिए अति आग्रह से अर्थदान

सामाजिक कार्यों की अर्थपूर्ति समाजजनों के आर्थिक योगदान से पूरी होती है। विभिन्न सामाजिक प्रकल्पों की पूर्ति के लिये समाज…

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अपने आर्थिक-सामाजिक स्तर अनुरूप समारोह का आयोजन

लम्बे समय से समाज में यह मुद्दा उठ रहा है कि तमाम सामाजिक कार्यक्रमों में मितव्ययिता होनी चाहिये। कोरोना काल…

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कितना उचित या अनुचित ? समाज संगठनों से जुड़े रहना।

जिस समाज में हम रहते हैं, अपने सुख-दुःख बांटते हैं, हमे उन समाजजनो के साथ घुल मिलकर रहना चाहिए। इसी…

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गाँव में बेटियों के विवाह से करियर होता है प्रभावित- भ्रम है या सच्चाई?

वर्तमान दौर में जब नारी भी पुरुष के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर करियर के पथ पर आगे बढ़ रही…

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“पुराने व नई पीढ़ी के बीच वैचारिक टकराव”- जिम्मेदार कौन?

वैचारिक टकराव – “कल- आज और कल” यह बीते समय की फ़िल्मी कहानी नहीं बल्कि घर-घर की कहानी है। नई…

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