पृथ्वी मुद्रा अनामिका (Ring Finger) के शीर्ष को अंगुष्ठ (Thumb) के शीर्ष के साथ मिलाने से बनती है। बाकी तीन अंगुलियां सीधी रखनी हैं। अनामिका सूर्य से और अंगुष्ठ मंगल से जुड़ा हुआ है। यह बहुत ही प्रभावशाली मुद्रा है। इसको लगातार 45 मिनट दोनों हाथों से करने से ऊर्जा आ जाती है। अनामिका अंगुली पृथ्वी तत्व की प्रतीक है।

पृथ्वी तत्व हमें स्थूलता, स्थायित्व देता है। इससे पृथ्वी तत्व बढ़ता है। अनामिका उंगुली सभी विटामिनों एवं प्राण शक्ति का केंद्र मानी जाती है। अनामिका हर समय तेजस्वी विद्युत प्रवाह करती है और साथ ही अंगूठा भी। अनामिका द्वारा ही हम तिलक लगाते हैं। पूजा अर्चना करते हैं और विवाह में अंगूठी पहनते हैं।
क्या होते हैं इससे लाभ
- शरीर के अस्थि संस्थान (हड्डियों) एवं मांसपेशियों को यह मुद्रा मजबूत बनाती है। अत: दुर्बल व कमजोरों के लिए पृथ्वी मुद्रा बहुत ही लाभकारी है।
- शरीर में विटामिनों की कमी को दूर करती है, जिसमें हमारी ऊर्जा बढ़ती है और चेहरे पर चमक आती है।
- पृथ्वी मुद्रा से जीवन शक्ति (Vital Force) का विस्तार होता है। काया सुडौल होती है। कद व वजन बढ़ाने में सहायक है। बढ़ते हुए कमजोर बच्चों के लिए तो अत्यन्त लाभदायक है।
- शरीर में स्फूर्ति, कान्ति और तेजस्व बढ़ता है।
- इस मुद्रा से आंतरिक प्रसन्नता का आभास होता है। उदारता, विचार शीलता, लक्ष्य को विशाल बनाकर प्रसन्नता प्रदान करती है।
- आन्तरिक सूक्ष्म तत्वों में सार्थक प्रवाह लाती है। संकीर्णता गिराकर हमें उदार बनाती है। अत: आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है।
- इस मुद्रा से पाचन शक्ति ठीक होती है। जिन लोगों की पाचन शक्ति कमजोर होती है, वे सदैव कमजोर व थके हुए लगते हैं। कई बच्चे भोजन तो खूब करते हैं फिर भी दुबले-पतले ही रहते हैं- ऐसे बच्चे यह मुद्रा अपनाऐं तो बहुत लाभ होगा।
- शरीर की ऊर्जा शक्ति के बढ़ने से मस्तिष्क भी अधिक क्रियाशील होता है- कार्य क्षमता बढ़ती है।
- पृथ्वी मुद्रा सर्दी जुकाम से भी बचाती है।
- अंगूठे की भांति अनामिका उंगुली में भी विशेष विद्युत प्रवाह होता है, इसीलिए इस उंगली से माथे पर तिलक किया जाता है।
- इस मुद्रा का दीर्घ काल तक अभ्यास करने में शरीर में चमत्कारी प्रभाव होगा। नया जोश, नई स्फूर्ति, आनन्द का उदय और रोम-रोम में ओज-तेज का संचार होगा।
- पृथ्वी तत्त्व का संबंध मूलाधार चक्र से है। अतः पृथ्वी मुद्रा से मूलाधार चक्र सक्रिय होता है और इससे जुड़े अंग सबल होते हैं। प्रोस्टेट ग्रन्थि का शोथ समाप्त होता है। हर्निया ठीक होता है तथा यह मुद्रा बालों, नाखुनों के लिए भी लाभकारी है।










Got a Questions?
Find us on Socials or Contact us and we’ll get back to you as soon as possible.