धैर्य और सफलता का गहरा रिश्ता है। अधीरता की स्थिति में हम गलत निर्णय ले लेते हैं। अतः परिणाम भी गलत निकलते हैं। इसलिए धीरज रखें और सफल बनें।
धीरज की महिमा बखाने उतनी कम लगती है। व्यक्ति के उतावलेपन से कोई कार्य सिद्ध नहीं हो सकता। धीरज संकटमोचन है। मंजिल पर पहुँचने के लिए व्यक्ति को धीरज रखना बहुत ज़रूरी है। हम अकसर सुनते हैं कि बना बनाया काम बिगड़ गया। अगर जरा सब्र रखा होता तो काम बन जाता। जल्दी का काम शैतान का।

कभी कभी मनुष्य धीरज वाला होते हुए भी उतावला हो जाता है और उतावली प्रवृत्ति के लोग भी धीरज रखने में सफल रहते हैं। कई बार हम निर्णय लेते समय हड़बड़ी में रहते हैं और गलत निर्णय ले लेते हैं। यही परीक्षा की घड़ी होती है। हम बहते पानी के साथ बहकर सुरक्षित रहना चाहते हैं या तेज़ धार के विपरीत बहने का निर्णय लेकर साहस दिखा सकते हैं।
जो पानी के बहाव के साथ बह जाते हैं, उन्हें कोई याद नहीं रखता। जो सही निर्णय लेकर गलत को गलत कहने का सामर्थ्य रखते हैं, भले ही उन्हें तात्कालिक लाभ न मिले, लोग उनका स्मरण करते हैं। जब व्यक्ति में धैर्य का अभाव हो जाता है, तो उसकी एकाग्रता स्वतः भंग हो जाती है। धैर्य रहित व्यक्ति शीघ्र फल की कामना करने लगता है और परिणाम सदैव उसके विरुद्ध जाता है। जिंदगी में सब्र रखना जरुरी है क्योंकि कहा भी गया है- “सब्र का फल मीठा होता है”।










Got a Questions?
Find us on Socials or Contact us and we’ll get back to you as soon as possible.