वास्तुदोष ने बढ़ाए कोरोना से मौत के आंकड़े

Date:

कोरोना की पहली लहर के बाद आई दूसरी लहर ने इस महामारी को मौत की बीमारी ही बनाकर रख दिया। कई लोग ही नहीं बल्कि परिवार तक मौत के ग्रास बन गये। कोरोना से हुई इन मौत के आंकड़ों को यदि वास्तु की नजर से देखा जाऐ तो ये अधिकांश मौतें ऐसे परिवारों में अधिक हुई जिनके मकानों में वास्तुदोष था। आईये देखें कौन सा दोष बना इस दौर में प्राणघातक?


देश में कोरोना के कारण हो रही मौतों से सभी के मन में दहशत व्याप्त है। विशेषज्ञों द्वारा भारत में अगस्त-सितम्बर के महीने में तीसरी लहर की सम्भावना भी व्यक्त की जा रही है जो कि कोरोना की दूसरी लहर से भी ज्यादा तीव्र और खतरनाक स्तर की होगी। मृत्यु संसार का अटल सत्य है परन्तु असामयिक मृत्यु को अनहोनी कहा जाता है।

जैसा कि हम कोरोना की दूसरी लहर में देख रहे है, देखते ही देखते कम उम्र के नौजवानों की भी मौतें हो रही है, जिन्हें कोई अन्य बीमारी भी नहीं थी। दुर्भाग्य से कहीं-कहीं तो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक पूरा परिवार ही काल का ग्रास बन गया हैं।

लगभग 30 वर्षों के वास्तु अध्ययन के आधार पर मैनें पाया कि जिन घरों में किसी भी कारण से अनहोनी होती है उन घरों में दो वास्तुदोष अवश्य होते है। पहला वास्तुदोष नैऋत्य कोण (दक्षिण और पश्चिम दिशा का कोना (SOUTHWEST CORNER) में और दूसरा ईशान कोण (उत्तर और पूर्व दिशा का कोना (NORTHEAST CORNER) में।


दोष बने भयावह

नैऋत्य कोण (SW) के वास्तुदोष जैसे – नैऋत्य कोण में भूमिगत पानी की टँकी, कुआँ, बोरवेल, सैप्टिक टैंक, बेसमेंट या किसी भी प्रकार से इस भाग में घर के अंदर या घर और कम्पाऊण्ड वॉल के बीच खुली जगह में इस भाग का फर्श नीचा हो या घर या कम्पाऊण्ड वॉल का दक्षिण, पश्चिम दिशा का यह कोना किसी भी रूप में बढ़ जाए या घर या कम्पाऊण्ड वॉल का मुख्य द्वार इस कोने पर हो या इस कोने के दक्षिण या पश्चिम दिशा में किसी भी ओर से रास्ता आकर टकरा रहा हो।

इनमें से ही कोई एक दोष होता है। ईशान कोण (NE) के वास्तुदोष जैसे – घर के अंदर का इस भाग का फर्श या घर और कम्पाऊण्ड वॉल के बीच खुली जगह में इस भाग की जमीन का लेवल अन्य दिशाओं की तुलना में ऊँचा हो जाए, उत्तर और पूर्व दिशा के इस कोने की दीवार अन्दर की ओर दब जाए, कट जाए, गोल हो जाए या घट जाए। इनमें से कोई एक दोष होता है।


बिना दोष के मकान वाले हुए स्वस्थ

कोरोना महामारी में जिन घरों में नैऋत्य कोण (SW) और ईशान कोण (NE) के उपरोक्त दोष नहीं हैं वहाँ निवास करने वाले भी कोरोना से संक्रमित तो होते हैं परन्तु उनमें से ज्यादातर घर पर ही रहकर जल्दी स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करते हैं, उन्हें दवाईयाँ समय पर उपलब्ध हो जाती है।

यदि किसी कारण उन्हें अस्पताल में भी भर्ती करना पड़े तो आसानी से अस्पताल में जगह मिल जाती है, ऑक्सीजन उपलब्ध हो जाती है, जीवन रक्षक दवाईयाँ, इंजेक्शन इत्यादि सभी सुलभता से प्राप्त हो जाते हैं। लेकिन जिन घरों में उपरोक्त में से एक भी वास्तुदोष है तो उन्हें कोरोना संक्रमण गम्भीर हो सकता है।

सही इलाज मिलने में समस्याओं का सामना करना पड़ता है, इलाज में पैसा जरूरत से ज्यादा लगता है, परन्तु जीवन को कोई खतरा नहीं रहता। मेरी सलाह है कि, जिन घरों में नैऋत्य कोण और ईशान कोण में यदि कोई वास्तुदोष है तो उन्हें दूर कर अनहोनी से बचें।

जिनके घर में अनहोनी हो चुकी है उन्हें भी परिवार के बाकी बचे सदस्यों की जीवन रक्षा के लिए घर के वास्तुदोषों को जल्द से जल्द दूर करना चाहिए। ध्यान रहे भाग्य से बढ़कर कुछ नहीं होता। वास्तु चाहे कितना ही खराब हो परन्तु भाग्य अच्छा हो तो अनहोनी से भी रक्षा हो जाती है।


Sri Maheshwari Times
Sri Maheshwari Times
Monthly Maheshwari community magazine connecting Maheshwaris round the globe.

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

Sri Maheshwari Times- March 2026 Edition

Check out Sri Maheshwari Times March 2026 'Mahila Visheshank'...

Varshika Gaggar को अमेरिका मे गोल्ड मेडल

नागौर। स्व. श्री महादेवजी एवं स्व. श्रीमती गीता देवी...

Sri Maheshwari Times- February 2026 Edition

Check out Sri Maheshwari Times February 2026 Edition on...

Ashva Ratna Mudra for Concentration

अश्व रत्न मुद्रा (Ashva Ratna Mudra) का अभ्यास एकाग्रता...