जज्बा हो तो कुछ भी असंभव नहीं है। इसी वाक्य को सिद्ध कर दिखाया है लातूर निवासी डॉ.पवन लड्ढा ने। वे व्यवसाय से तो चिकित्सक हैं, लेकिन ग्रीन लातूर बनाने के जज्बे ने उनकी एक ऐसी टीम खड़ी कर दी, जो हरियाली को समर्पित होकर सतत रूप से वृक्ष बचाने व वृक्ष लगाने में जुटी हुई है।
डॉ.पवन लड्ढा –
डॉ.पवन राठी द्वारा वर्ष २०१५ में स्थापित लातूर ट्री मूवमेंट की ग्रीन लातूर ट्री टीम अपनी स्थापना से ही पेड़ों को बचाने तथा उन्हें लगाने का काम कर रही है। 1 जून 2019 से 20 जुलाई 2020 तक 422 दिनों में अभूतपूर्व रूप से 24860 छोटे और बड़े पेड़ लगाए। लॉकडाउन के 70 दिनों के भीतर, ग्रीन आर्मी के इन सदस्यों ने 1880 बड़े पेड़ लगाए।

ये सदस्य एक घर, एक पेड़, एक महिला, एक पेड़, एक नल, एक पेड़ की अवधारणा को साकार करते हुए लगातार 420 दिनों से काम कर रहे थे। पेड़ों को गर्मियों के दौरान टीम ने शहर की सड़कों पर सभी पेड़ों को जीवित रखने के लिए पानी के 266 छोटे और बड़े टैंकरों का इस्तेमाल किया और उन्हें पानी पिलाया।
पूरी टीम है समर्पित:
पूर्ण समर्पित भाव से यह संस्थाा काम कर रही है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस १ जून 2019 से 20 जुलाई, 2020 तक, इस टीम ने एक भी दिन बिना अवकाश मनाये वृक्षों के रख-रखाव का निरंतर कार्य किया है।
हर दिन सुबह 6 से 9 बजे तक, उन्होंने गड्ढो को खोदने पौधों को लाने, पेड़ों को पानी देने, पौधों को रोपने, जैसे सभी काम किए, वह भी बिना किसी सरकारी मदद के। इससे ग्रीन बेल्ट में कई पेड़ बच गए।

साथ ही भविष्य में पेड़ों के माध्यम से स्वच्छ हवा प्रदान करने के लिए 26 स्थानों पर पेड़ लगाकर हरित ऑक्सीजन क्षेत्र की स्थापना की गई। संस्था ने मियावाकी जैसी परियोजनाएं पूरी कीं। शहर के कई मुख्य चौराहों को सजावटी पेड़ों से सजाया गया था।
नीम है इस संस्था का अध्यक्ष:
ग्रीन ट्री टीम शहर के सभी हिस्सों जैसे डिवाइडर, जिला खेल परिसर, बस स्टैंड, विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों में सड़क के दोनों ओर पेड़ लगा रही है। टीम के पास कोई अध्यक्ष और कोई पदाधिकारी नहीं है। कोई बैंक खाता भी नहीं है। नीम का पेड़ इसका अध्यक्ष है और वाड- पिंपल गाइड है।
शहर में जन्मदिन, शादी, वर्षगाँठ और दोस्तों की वर्षगांठ के अवसर पर, दानदाताओं की उपस्थिति में पेड़ों का अनुरोध किया जाता है और लगाया जाता है।

पेड़ लगाने और पेड़ की देखभाल के इस आंदोलन में, ग्रीन लातूर ट्री टीम के डॉ. पवन लड्ढा के साथ नगर निगम पार्षद इमरान सैयद, डॉ. भास्कर बोरगांवकर, डॉ. कल्याण बरमड़े, पद्माकर बागल, प्रमोद निपानिकर, मनमोहन डागा, वैशाली लोंढे, श्वेता लोंढे, ऋषिकेश दरेकर, गंगाधर पवार, सुहास पाटिल, जफर शेख, हितेश डागा, चेतन्य प्रयाग, डॉ. शैलेश पडगीलवार, मिर्झा मोईझ, सीताराम कन्जे, नामदेव सुब्बानवाड, डॉ. मंजुषा कुलकर्णी, सुलेखा कारेपुरक, डॉ. शांतिलाल शर्मा, सार्थक शिंदे, ऋषिकेश पोद्दार, शैलेश सूर्यवंशी, कल्पना फरकाण्डे, स्वाति यादव, पूजा निचड़े, प्रफुल्ला पाटिल, विमल रेड्डी, विकास कातपुरे आदि कई प्रबुद्धजन जुड़े हुए हैं।
ये सभी पेड़ों को लाने, गड्ढों को खोदने, पेड़ लगाने, पेड़ों को बांधने, पेड़ को पानी देने आदि के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।
–डॉ.पवन लड्ढा










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