नारी सशक्तिकरण की ज्योति जलाती- डॉ सुलक्ष्मी तोषनीवाल

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शिक्षा का उद्देश्य विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता प्राप्त करना है, अपनी सोच का दायरा विकसित करना है, आत्मविश्वास को बढ़ाना है। सबसे महत्वपूर्ण यदि एक महिला शिक्षित होगी तो परिवार, समाज व राष्ट्र स्वयं ही शिक्षित व जागरूक होगा। अपने इन्हीं आदर्शों के साथ नारी सशक्तिकरण में शिक्षा के द्वारा अपना योगदान दे रही हैं, ब्यावर निवासी डॉ सुलक्ष्मी तोषनीवाल।

महिला सशक्तिकरण की कल्पना को साकार करती डॉ सुलक्ष्मी तोषनीवाल वर्तमान में सनातन धर्म राजकीय महाविद्यालय, ब्यावर (राज.) में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत है। उन्होंने अपने प्रोफेशनल जीवन का प्रारम्भ विपरीत पारिवारिक परिस्थितियों के बीच लगभग 35 वर्ष की उस उम्र में किया जहाँ व्यक्ति के जीवन में स्थिरता आ जा जाती है। परन्तु इन्होंने उस समय एम कॉम, नेट, पीएच.डी. आदि पढ़ाई प्रारम्भ कर राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित कॉलेज व्याख्याता परीक्षा उत्तीण की।

इनका मानना है कि यदि अपना लक्ष्य महान है तो उम्र व विपरीत परिस्थितियों की बाधाओं को भी आसानी से दूर किया जा सकता है। आज ये स्वयं ही महिला सशक्तिकरण का सशक्त व जीवन्त उदाहरण हैं। और स्वयं सभी को विद्या अर्जन हेतु प्रेरित व प्रोत्साहित कर रही हैं।


कई संस्थाओं से सम्बद्ध

डॉ तोषनीवाल विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर महिलाओं को शिक्षा के लिए प्रेरित कर रही हैं। इस हेतु ये विभिन्न मंचों से जैसे माहेश्वरी समाज, भारत विकास परिषद, मातृ शक्ति दुर्गा वाहिनी, लायन्स क्लब, श्री वर्धमान शिक्षण समिति व श्री गोदावरी शिक्षण समिति द्वारा संचालित विभिन्न संस्थाओं, आर्य समाज आदि विभिन्न मंचों द्वारा महिलाओं को शिक्षा व उद्यमिता हेतु निरन्तर प्रेरित व जागृत कर रही हैं।

उनके लेख विभिन्न राष्ट्रीय व अर्न्तराष्ट्रीय जर्नल व पुस्तकों में प्रकाशित हुए हैं जो महिला सशक्तिकरण व उद्यमिता तथा ग्रीन मार्केटिंग (पर्यावरण रक्षा) से सम्बन्धित हैं। कई राष्ट्रीय अर्न्तराष्ट्रीय संगोष्ठियों में भी अपने विचारों को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया है।


पर्यावरण व संस्कृति की रक्षा

महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ ये पर्यावरण रक्षा हेतु वृक्षारोपण के लिए भी सभी को प्रेरित करती हैं। ये विद्यार्थियों को साथ लेकर वृक्षारोपण करती है ताकि उनमें पर्यावरण चेतना विकसित हो। आजादी के अमृत महोत्सव के जश्न में भी परमार फाउण्डेशन लामाना में 75 नीम के वृक्ष लगाकर वृक्षारोपण का पुनीत कार्य किया।

आपकी पुस्तक ‘भारतीय सांस्कृतिक प्रतिमानों का व्यावसायिक महत्व’ में आपने स्वास्तिक, माँ दुर्गा, शिवजी, नीम, पीपल व वृट वृक्षों आदि द्वारा विभिन्न भारतीय सांस्कृतिक प्रतीकों का महत्व समझाया। उनका मानना है कि ये केवल धार्मिक महत्व ही नही है वरन् व्यावसायिक महत्व के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण व पर्यावरण रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

डॉ तोषनीवाल लोगों को पर्यावरण रक्षा हेतु वृक्षारोपण व व्यवसाय तथा दैनिक जीवन में पर्यावरण के अनुकूल उपायों को अपनाने पर जोर दे रही हैं। हरित विपणन को अपनाने हेतु भी प्रेरित करती है।


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