नांदेड़ (महाराष्ट्र) में समाज सेवा के क्षेत्रमें वरिष्ठ किशनप्रसाद दरक एक ऐसे नाम हैं, जिन्होंने शिक्षादान को एक महादान का अभियान तक बना डाला। यह उनका योगदान ही है कि उनकी प्रेरणा व सहयोग से बड़ी संख्या में समाज के युवाओं ने प्रशासनिक सेवा तक में बड़ी सफलता हासिल की।
लक्ष्मी एवं सरस्वती पुत्रों के इस समाज में आज भी ऐसे अनेक बालक हैं जिनमें ज्ञान की ललक है किंतु आर्थिक कठिनाइयों के कारण उनके ज्ञानार्जन में बाधाएं आ रही हैं। इस बात को समझ कर नांदेड जिला माहेश्वरी समाज ने श्री हरिकिशनजी बजाज मेमोरियल माहेश्वरी शिक्षण विकास संस्था की स्थापना करने का निर्णय लिया तथा श्री किशनप्रसाद दरक की क्षमताओं को पहचान कर उन्हें इस संस्था के सचिव पद का कार्यभार सौंपा। वर्ष 2008 में स्थापित इस संस्था के माध्यम से अब तक 550 से अधिक युवाओं को रु 77 लाख से अधिक का आर्थिक सहयोग किया जा चुका है। दरकजी की कार्यशैली एवं समर्पण भाव को देखते हुए गत तीन सत्र से सचिव पद का कार्य उन्हीं के पास रखा गया है। अपने पारिवारिक कार्य रूप में आप 1977 से दरक कॉमर्स क्लासेस संस्था चलाते हैं। आपके जेष्ठ पुत्र डॉक्टर रामनारायण अब इस संस्था का कार्य देखते हैं। आपके कनिष्ठ पुत्र भरतकुमार एसबीआई लाइफ कंपनी में सिनियर अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। आप की धर्मपत्नी गीता देवी का भी सदैव सहयोग प्राप्त हैं।
संस्कारों में मिली समाजसेवा
मूलतः नागौर जिला के अलनियावास निवासी दरकजी का परिवार लगभग 200 वर्ष पूर्व महाराष्ट्र में नांदेड जिला के छोटे से कस्बे आष्टी में पहुंचा। किशन प्रसादजी के पिताजी हीरालालजी सुविख्यात वैद्य होने के साथ ही स्वतंत्रता सेनानी भी थे। तत्कालीन निजाम स्टेट से मुक्ति हेतु हुए संग्राम में उन्होंने बढ़-चढ़कर योगदान दिया था। श्री दरकजी की माताजी सीताबाई स्वयं अशिक्षित थी किंतु उन्हें शिक्षा का महत्व पता था। इस कारण अपने पुत्र को लेकर वह नांदेड शहर में आयी। यहाँ शिक्षा ग्रहण करते हुए महाविद्यालय जीवन में मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ आंदोलन, मराठवाडा विकास आंदोलन, ब्रॉडगेज आंदोलन आदि में सक्रिय रहते हुए दरकजी ने समाज कार्य में भी अपना योगदान देना प्रारंभ किया। वर्ष 1975 में नांदेड़ में पहली माहेश्वरी कंज्यूमर कोऑपरेटिव सोसाइटी की स्थापना हुई और इस संस्था के उपाध्यक्ष पद पर आपका चयन हुआ।
प्रशासनिक सेवा के लिये बने प्रेरणा
मारवाड़ी युवा मंच के सचिव के नाते श्री डोंगरे महाराज की भागवत कथा में सक्रिय सहयोग, समाज से घुंघट प्रथा हटाने हेतु किए गए प्रयासों में योगदान, आदि कार्य नांदेड जिला माहेश्वरी सभा के अध्यक्ष के नाते किये। माहेश्वरी विद्या प्रचारक मंडल पुणे के सिविल सर्विस कमेटी सदस्य तथा महाराष्ट्र प्रदेश माहेश्वरी सभा प्रशासनिक सेवा समिति प्रमुख के नाते महाराष्ट्र के लगभग सभी जिलों के साथ ही मध्य प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों के माहेश्वरी युवाओं को सिविल सर्विसेस का महत्व समझाकर इस क्षेत्र से जुड़ने का आवाहन करने का कार्य गत 6 वर्षों से सतत रूप से कर रहे हैं। इस कार्य में समाज के अनेक आईएएस, आईपीएस, आईआरएस अधिकारियों का सक्रिय सहयोग मिल रहा है। आज समाज के न केवल युवक अपितु अनेक युवतियां भी सिविल सर्विसेस की परीक्षाओं की तैयारियां कर रही हैं। गत 6 वर्षों के इन प्रयासों से प्रेरणा लेकर आज अनेक माहेश्वरी युवक युवतियां सफलता प्राप्त कर अधिकारिक पद पर विराजमान हो चुके है।
सेवा के वृहद आयाम
समाज सेवा करते समय अनेक परिवारों से संपर्क होता है। तब आर्थिक कठिनाइयों के कारण इन परिवारों को आवश्य औषधोपचार, दैनंदिन जीवन यापन एवं सुख दुख में अनेक परेशानियों से रूबरू होना पड़ रहा है, यह अनुभव श्री दरकजी को काम आया। उनके विचारों से सहमति रखने वाले उनके साथी गोपाललाल लोया, ओमप्रकाश इन्नानी, रामप्रसाद मूंदड़ा, जगदीश बियानी आदि ने समाज के गरीब और जरूरतमंद परिवारों की मदद के लिए नांदेड़ के भामाशाह रामलाल बाहेती की प्रेरणा से ‘‘केशरबाई गणेशलाल बाहेती चैरिटेबल ट्रस्ट’’ की स्थापना की। दरकजी की सिद्धहस्त लेखन शैली, कानूनी जानकारी एवं संस्था संचालन का दीर्घ अनुभव देखते हुए इस संस्था का सचिव पद भी उन्हें ही सौंपा गया। विविध संस्थाओं के कार्य के साथ ही आप वर्तमान में महाराष्ट्र प्रदेश माहेश्वरी सभा प्रशासनिक सेवा समिति के प्रमुख, अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा के कार्यकारी मंडल सदस्य, ओंकारनाथ मालपानी महाराष्ट्र महेश सेवा निधि के न्यासी के रूप में भी सेवारत हैं।











Got a Questions?
Find us on Socials or Contact us and we’ll get back to you as soon as possible.