संवेदनाओं की सरिता- कोमल झंवर

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आमतौर पर प्रबंधकीय व्यक्तियों को सख्त माना जाता है। बुलढाणा निवासी कोमल सुकेश झंवर भी काम के मामले में तो सख्त हैं लेकिन उनके मन में उमड़ती संवेदना की सरिता इससे भी तिरोहित नहीं हुई। व्यक्तिगत स्तर पर बुलढाणा अर्बन को ऑपरेटिव सोसायटी हो या सहकार विद्या मंदिर सभी संस्थाओं के कर्मचारियों के प्रति वही स्नेही व संवेदना उमड़ता है, जो अपने परिजन के प्रति है। इसी ने उन्हें विलक्षण बना दिया।

विश्व में, भारत देश में, देश के राज्य में, राज्य के जिले में कई महिलाओं ने विभिन्न क्षेत्र में अपने साहस और सूझबूझ, प्रतिष्ठा- सम्मान का परिचय दिया है। हर परिस्थिति फिर चाहे वह अनुकूल हो या प्रतिकूल महिलाएँ प्रेम, धैर्य, ममता, सहनशीलता, हिम्मत जैसे गुणों से परिस्थिति को अनुकूल लेती ही हैं। लेकिन अनुकूल परिस्थिति में कुछ महिलाएं ऐसी है जो इस परिस्थिति का उपयोग समाज के उत्थान के लिए करती हैं।

ऐसी ही विभूति हैं, बुलढाणा निवासी डॉ सुकेश झंवर की धर्मपत्नी व राधेश्याम चांडक की सुपुत्री कोमल झंवर। वे आज बैकिंग और शिक्षा क्षेत्र में बुलढाणा जिले में एक सुपरिचित नाम है। एक ऐसी महिला जो शिक्षित हैं और अपने संस्कारों का पालन करना जानती हैं। वे मजबूत विचारों की नारी हैं और उनकी आँखों में कई सपने हैं। निश्चित ही ये सपने हैं, अपने परिवार के प्रति और ‘बुलढाणा अर्बन को-ऑप. सोसायटी’ एवं ‘सहकार विद्या मंदिर, बुलढाणा’ एवं उसकी 22 शाखाओं में कार्य करने वाले प्रत्येक कर्मचारी के प्रति।


सादा जीवन व उच्च विचार ही पहचान

कोमल बुलढाणा अर्बन को-ऑप. सोसायटी के संस्थापक श्री राधेश्याम चांडक की सुपुत्री एवं बुलढाणा अर्बन कोऑपरेटिव सोसायटी के सीएमडी डॉ. सुकेश झंवर की पत्नी हैं। कुछ लोग अपने जीवन में महान लक्ष्यों की प्राप्ति का उद्देश्य लेकर जीते है लेकिन श्रीमती झंवर एक ऐसी शख्शियत हैं जो ‘सादा जीवन और उच्च विचार’ के साथ जीने में विश्वास रखती है।

उनके जीवन की ‘सादगी, विनम्रता और मन की उदारता’ उन्हें उस ऊँचाई की ओर ले जा रही है जहाँ उनके संस्कार भी उनकी सहायता कर रहे है। शिक्षा जगत में यशस्विता की नई कहानी लिखने वाली बुलडाणा अर्बन चॅरिटेबल सोसायटी, बुलडाणा की अध्यक्षा श्रीमती झंवर की जिंदगी परिश्रम की अद्भुत कहानी है।


बचपन से मिले सेवा के संस्कार

श्रीमती झंवर का जन्म 12 मार्च 1979 में बुलढाणा (महाराष्ट्र) में श्री राधेश्याम चांडक के यहां हुआ। 23 जनवरी 2003 को डॉ. सुकेश झंवर के साथ विवाह बंधन में बंध गई। विज्ञान एवं कम्प्यूटर टेक्नॉलॉजी में पारंगत हो उन्होंने स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। सन 1998 में जब सहकार विद्या मंदिर, बुलढाणा (अंग्रेजी माध्यम) की आधारशिला रखी गई तब वे अपनी शिक्षा पूर्ण करने में व्यस्त थी, लेकिन शिक्षा के प्रति प्रेम और लगाव ने उन्हें बैचेन कर दिया। उन्होनें ठान लिया कि वे शिक्षा क्षेत्र में ही कार्य करेंगी।

उनके दादाजी स्व. श्री देवकिसन चांडक ने भी डोंगरखंडाला गाँव में श्री संभाजी राजे शिक्षण संस्था नाम से स्कूल शुरु किया था, जिसके वर्तमान अध्यक्ष पिता श्री चांडक हैं। उनके दादाजी ने बचपन से उन्हें ‘सभी को मिले शिक्षा’ विशेष तौर पर ग्रामीण इलाको में शिक्षा का महत्व बढ़े इस ओर प्रेरित किया।

फलत: अपनी स्नातक शिक्षा पूर्ण कर वे नवोदित सहकार विद्या मंदिर, बुलढाणा में अध्यापिका के पद पर नियुक्त हुई और बहुत ही कम आयु में अध्यापन करते हुए बालमन की एवं अध्यापको की मानसिकता से अवगत होती गई।


विवाह के बाद मिली बड़ी जिम्मेदारी

विवाह पश्चात बेटी, बहू, पत्नी और माँ की जिम्मेदारियों का वहन करते हुए उन्होनें बुलडाणा अर्बन चॅरिटेबल सोसायटी, बुलढाणा की अध्यक्षा का पदभार संभाला और बुलढाणा जिले में सहकार विद्या मंदिर स्कूल का 22 शाखाओं में विस्तार किया जहाँ 32000 विद्यार्थी (ग्रामीण भाग) शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। पीछे मुड़ कर यदि इसका अवलोकन करे तो यह कोई साधारण कार्य नहीं है। सहकार विद्या मंदिर को विस्तारित करने में उनकी लगन, परिश्रम, शिक्षा, ध्येय, दिनरात की मेहनत शामिल है।

शिक्षा क्षेत्र में ध्येय पूर्ति के मार्ग में पिता श्री चांडक और पति डॉ. झंवर का उन्हें पूर्ण सहयोग प्राप्त हो रहा है। शिक्षा क्षेत्र के साथ ही वे बैकिंग क्षेत्र का भी ज्ञान रखती हैं। बुलढाणा अर्बन को-ऑप. सोसायटी एवं ‘जिजामाता महिला नागरिक सहकारी बँक’ का भी उन्होंने अध्यक्षा का पद सम्भाला।

श्रीमती झंवर एक सामाजिक कार्यकर्ता एवं संवेदनशील व्यक्तित्व की धनी है। समाज ऋण को अदा करने हेतु बुलढाणा अर्बन गरबा फेस्टिवल एवं गणेश महोत्सव का प्रतिवर्ष आयोजन उनके मार्गदर्शन में किया जाता है जिसमें वे स्वयं पूरी इच्छा उमंग से उपस्थित होती हैं। युवाओं और बालकों के लिए नृत्य/खेल प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की जाती हैं। प्रत्येक युवा और बालक प्रतिभा संपन्न बने और उज्जवल भविष्य की राह चुनें यही उनकी मंशा है।


सहकार विद्या मंदिर में आधुनिकतम शिक्षा

सहकार विद्या मंदिर, बुलढाणा एवं उसकी शाखाओं में नवीनतम् आधुनिक शिक्षा प्रणाली को कार्यान्वित करने में वे हरपल कटिबद्ध हैं। शिक्षा के इस परिसर में आज उन्होनें उन सारी सुविधाएँ और सामग्री को उपलब्ध कर दिया है जो अब तक केवल महानगरों में ही हैं।

35 एकड़ की जमीन पर विस्तारित सहकार विद्या मंदिर व जूनियर कॉलेज पूर्णत: अंग्रेजी माध्यम के अंतर्गत कक्षा 1 से 10वीं एवं 11वीं तथा 12वीं कॉमर्स विभाग एवं विज्ञान विभाग (MAHARASHTRA BOARD & CBSE SYLLABUS) से विद्यार्थी शिक्षा से लाभान्वित हो रहे है। इस विद्यालय से शिक्षा प्राप्त अनेक विद्यार्थी उच्च पदो पर अधिकारी, डॉक्टर, व्यवसायी, इंजीनियर आदि के रूप में देश सेवा में अपनी भूमिका निभा रहे है।

यह श्रीमती झंवर के अनेक वर्षो के परिश्रम की तपस्या का ही फल है । कक्षा 11वीं और 12वी में आरंभ किए JEE, NEET, CET एवं NDA के विशेष अध्यापन वर्गो से विद्यार्थी उच्चशिक्षित हो रहे हैं। इसी वर्ष महाविद्यालय में कॉमर्स विभाग में CA/CS/CMA का अभ्यासक्रम भी आरंभ कर दिया गया है।


खेलों के लिये भी उत्कृष्ट व्यवस्था

विद्यार्थियों को शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ बनाने का काम खेल करते हैं। शिक्षा क्षेत्र के साथ-साथ विद्यार्थियों में खेल के प्रति भी रुचि अधिक होती है। इसी रुचि को ध्यान में रखते हुए उन्होनें शिक्षा के साथ विद्यार्थियों को खेल के प्रति भी प्रोत्साहित किया। परिणाम यह है कि सहकार विद्या मंदिर के अनेक विद्यार्थी स्कूल के आरंभ से अभी तक हॉकी, क्रिकेट, बॉस्केटबॉल, स्केटिंग, मलखंब, एथलेटिक्स, स्वीमिंग, जिम्नास्टिक, फुटबॉल, हँडबॉल, चेस, कैरम, बैडमिंटन, बैंड इत्यादि विभिन्न प्रकार के आऊटडोर एवं इनडोर खेलो में राष्ट्रीय, राज्य, विभागीय स्तर एवं अंतर्शालेय खेलो में कीर्तिमान प्राप्त कर चुके हैं और कर रहे हैं।

इन सबकी गवाही देते हैं, सहकार विद्या मंदिर के खेल के मैदान । सहकार विद्या मंदिर के खेल मैदान पर विद्यार्थियों के लिए विभिन्न खेलों की प्रतियोगिताएँ रखी जाती हैं। चीते की तरह दौडते खिलाड़ी देख सभी की आँखे फटी की फटी रह जाती हैं। खेलो के लिए आवश्यक एवं पर्याप्त खेल सुविधा से युक्त हैं ये खेल के मैदान। भविष्य में सहकार विद्या मंदिर, बुलढाणा में सभी खेलो के लिए एक आधुनिक शैली में सुविधा युक्त तीन-चार मंजिल का क्रीडा संकुल बनाने का भी उन्होनें संकल्प (मनसूबा) लिया है।

हर प्रकार के खेल का प्रशिक्षण निपुण प्रशिक्षको द्वारा दिया जाता है। समय की दौड़ में जो खेल पीछे छूट गए है जैसे गिल्ली-डंडा, भौंरा, रस्सी के खेल आदि से भी विद्यार्थियों को परिचित करवाने का श्रेय श्रीमती झंवर को है। खेल क्षेत्र में यह एक संस्कृति संवर्धन का प्रशंसनीय कार्य सहकार विद्या मंदिर द्वारा किया जा रहा है। उनका कहना है कि खेल, केवल शारीरिक समृद्धता ही नहीं बल्कि हमारी भारतीय संस्कृति की पहचान हैं।

खेलों से विद्यार्थी खेल संस्कार के तहत समानता, एकता, मेल-जोल, राष्ट्रप्रेम, स्नेह, एक-दूसरे की सहायता, समूह महत्व इत्यादि गुणों को अपनाते हैं और ये गुण विद्यार्थियों के लिए अच्छा खिलाड़ी, अच्छा नागरिक और सुदृढ़ राष्ट्र निर्माण में सहायक हैं। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को वे महत्व देती हैं। अध्ययन की कक्षा हो या खेल का मैदान वे स्वयं प्रत्येक विद्यार्थी से संवाद करती हैं और विद्यार्थियों की योग्य जरुरतों का ध्यान रखती हैं।

वर्तमान में खेल क्षेत्र में सहकार विद्या मंदिर, बुलढाणा एवं उसकी शाखाओं में प्रशिक्षण लेते हुए विद्यार्थी भविष्य में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्कूल का एवं स्वयं का नाम रोशन अवश्य करेंगे इसमें कोई शक नहीं। समय ही इस सुनहरे पल का साक्षी बनेगा।


अवकाश के दौरान भी विशेष आयोजन

संपूर्ण वर्ष विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों के लिए खेल के मैदानों पर प्रशिक्षण सुविधा उपलब्ध है परंतु ग्रीष्म अवकाश में सहकार विद्या मंदिर, बुलढाणा का खेल मैदान व स्कूल बाह्य विद्यार्थियों के लिए भी खुला रहता है। ग्रीष्म अवकाश का सदुपयोग हो, इस हेतु विद्यार्थियों की आयु के अनुसार भी एक महीने का निवासी/अनिवासी खेल प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे विभिन्न आयु के विद्यार्थियों में खेल रुचि जागृत होती है।

सहकार विद्या मंदिर, बुलढाणा विद्यार्थियों की शारीरिक स्वस्थता को महत्व देता है। अतः प्रतिवर्ष ग्रीष्म अवकाश (अप्रैल-मई) में निवासी ‘कामयाब कँप’ का आयोजन 20-25 दिनों का किया जाता है। इस वर्ष 2023 में भी इसका आयोजन 1 मई 2023 – 17 मई 2023 तक किया गया। विभिन्न प्रकार के खेल एवं आधुनिक नृत्य शैली प्रशिक्षण भी इसका आकर्षण है।

साथ ही स्वस्थ जीवन हेतु योगसाधना, मिलट्री ट्रेनिंग, संस्कृत गीत, श्लोक, आध्यात्म, ईश्वर प्रेम, आपसी सुसंवाद, अन्न एवं जल के महत्व का ज्ञान दिया जाता है। संक्षिप्त में प्रत्येक विद्यार्थी के जीवन की मजबूत आधारशिला एवं सुयोग्य पथ की दिशा देने का कार्य तथा एक आदर्श नागरिक बनकर, समृद्ध राष्ट्र निर्माण का कार्य करने में श्रीमती झंवर के मार्गदर्शन में सहकार विद्या मंदिर हर क्षण तत्पर है और इसी तत्परता को कायम रखेगा।


सभी के लिये संवेदनशीलता

व्यक्ति का जीवन वही नहीं है जो उसके बाहर से झलकता है। श्रीमती झंवर अपने पिता की तरह सुलझी हुई हैं। स्वभाव में नम्रता, दया, करुणा, सम्मान, आदर में पिता की तरह उनमें ये सभी गुण समाए हैं। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर परिस्थितिनुरूप कामकाज के दौरान कठोरता को भी अपनाना ही पड़ता है। सच्चाई भी यही है व्यक्ति हो या संस्था अनुशासन अपनी विशेष पहचान बनाने के लिए आवश्यक है।

पिता श्री चांडक द्वारा केवल 12000 रुपये पूंजी और 72 सदस्यों के साथ आरंभ किए बुलढाणा अर्बन को-ऑप. सोसायटी को वटवृक्ष का रूप दिया गया। अपने पिता के भव्य गौरव का स्वप्न साकार करने में उनका परिश्रम प्रशंसनीय है। भारत की तथा एशिया में प्रथम को-ऑप. संस्था का दर्जा प्राप्ति में पिता-पुत्री-पति का पूर्ण समर्पण भाव दृष्टिगोचर होते है।

किसी भी सफलता का शिखर संघर्ष के रास्तों से ही गुजरता है, लेकिन यही संघर्ष, रुकावटें, कठिनाई, विनम्रता की सफलता को और भी मजबूत बनाते हैं। यही मजबूती श्रीमती झंवर के मुख की मुस्कान बताती है। हर परिस्थिति मुस्कान संस्था के कर्मचारियों और अध्यापको को भी सदैव ‘बढ़े चलो’ की प्रेरणा देती है । यही सफलता की कहानी आज बुलढाणा अर्बन एवं सहकार विद्या मंदिर की मुखरित विनम्रता से भरी सफलता की गूंज चारो ओर फैलती हुई बताती है।


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