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Shivdayal-Kabra

कलम के पुजारी- शिवदयाल काबरा

कहते हैं कि जब माँ सरस्वती की कृपा होती है, तो गूंगा भी बोलने लगता है। यह पंक्ति देरगाँव जिला गोलाघाट (असम) निवासी शिवदयाल काबरा पर खरी उतरती है। नियतीवश वे उच्च शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाये लेकिन माँ सरस्वती की ऐसी कृपा हुई कि पत्रकारिता, लेखन व अनुवाद ही उनके सम्मान का कारण बन गये। उम्र के 76वें पड़ाव पर भी उनकी यह कलम साधना आज भी अनवरत जारी है।

शिवदयाल काबरा असमिया भाषा के ख्यात लेखक- अनुवादक हैं। उन्होंने असम साहित्य सभा के असमिया विश्वकोश (संपादक: डॉ. बीरेन्द्रनाथ दत्त) में सिंधी लोक साहित्य का असमिया भाषा में अनुवाद कार्य किया। उन्होंने देरगांव से ‘आमार असम’ (लोकप्रिय असमिया दैनिक) के लिए लगभग दस वर्ष संवाद – संकलन-लेखन भी किया।

उन्होंने असमिया के साथ हिंदी में भी लेखन-अनुवाद कार्य किया है। श्री काबरा मूलत: पत्रकार हैं। असम साहित्य सभा के नवनिर्वाचित अध्यक्ष इमरान शाह की कहानियों का हिंदी अनुवाद, प्रख्यात साहित्यकार होमेन बरगोहाई के आलेख ‘मारवाड़ी समाज असमिया है कि नहीं?’ आदि, प्रफुल चंद्र बोरा, डॉ. निर्मल साहे वाला इत्यादि की असमिया कहानियों-लेखों का हिंदी अनुवाद किया है। श्री काबरा नवभारत टाइम्स और दैनिक विश्वमित्र, भाषा (समाचार एजेंसी) इत्यादि के लिए संवाद लेखन करते रहे।


श्री काबरा का जन्म 9 मार्च 1947 को देरगाँव (असम) में स्व. श्री मोहनलाल व श्रीमती कोयली पाना काबरा के यहाँ हुआ था। हायर सेकेण्डरी तक ही शिक्षा ग्रहण कर पाये थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और सन् 1969 में ‘राष्ट्रभाषा रत्न’ की डिग्री/ गौहाटी से़, असम में प्रथम स्थान के साथ प्राप्त की।

इससे पहले ‘राष्ट्रभाषा कोविद’ की डिग्री भी पूर्वोत्तर भारत में प्रथम स्थान पर रह कर प्राप्त की थी। सन् 1965 में स्काउटिंग की सर्वोच्च पदवी प्रेसिडेंट्स स्काउट’ राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के हाथों राष्ट्रपति भवन में प्राप्त की। आपको हिंदी, असमिया, अंग्रेजी, राजस्थानी, बंगाली, नेपाली, भोजपुरी आदि भाषाओं का विशेष ज्ञान प्राप्त है।


श्री काबरा ने पत्रकारिता की शुरुआत सन् 1962 में तिनसुकिया से प्रकाशित ‘साप्ताहिक अकेला’ से प्रारंभ की जो वर्तमान तक जारी है। बाद में नवभारत टाइम्स, दैनिक हिंदु- स्तान, दैनिक विश्वमित्र, सन्मार्ग, ‘पूर्वज्योति’, संवाद संस्था- ‘भाषा’ आदि से भी सम्बद्ध रहे।

उनके लेख नवनीत, कादम्बिनी, सरिता, मुक्ता, माधुरी, धर्मयुग, हिंदुस्तान, मनमोहन, माहेश्वरी, माहेश्वरी सेवक, राजस्थानी वीर, रंग, पूर्वांचल प्रहरी, दैनिक पूर्वोदय, हिंदी सेंटिनल, सप्तसेतु, धर्मयुग, आदि अनेकों पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे।


वेदप्रताप वैदिक के शोध ग्रंथ ‘हिंदी पत्रकारिता : विविध- आयाम’ में ‘असम की हिंदी पत्रकारिता’ शीर्षक से उनका एक आलेख प्रकाशित हुआ है। असम साहित्य सभा के आजीवन सदस्य के साथ ही श्री काबरा देरगांव पत्रकार संघ के पूर्व सभापति भी रहे और संप्रति उपदेष्टा – सलाहकार हैं।

भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा उन्हें मानद ‘एनिमल वेल्फेयर आफिसर’ नियुक्त (अवैतनिक और आजीवन) भी किया गया है। वे असमिया और हिंदी दोनों भाषाओं में लेखन- अनुवाद में समान रूप से सक्रिय हैं। राष्ट्र भाषा प्रचार, नागरी लिपि प्रचार, राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा के प्रचारक तथा परीक्षा-उत्तर पुस्तिकाओं के परीक्षक भी रहे हैं।