‘‘आग नही चिंगारी, मै भारत की नारी कर्तव्य और भावना का संगम’’
विश्व महिला दिवस पर मुझे यह मौका मिला है कि मैं भारतीय नारी होने के गौरव, सम्मान और अस्तित्व का आंकलन कर सकूं। विश्व भर की महिलाएँ प्रगति पथ पर पहुँच चुकी हैं। वह हर कदम पर पुरुषों पर अपनी छाप बनाने के लिए संघर्ष भी कर रही है। नारी अग्नि का विध्वंसकारी रूप न होकर एक चिंगारी है जो सकारात्मक सृजन करती है।

भारत मे सामाजिक कुरीतियों के चलते नारी स्वयं ही अपनी बहन बेटी पर जुल्म करती है। वह भी कही न कही इस बात को मानने लगी है कि अब हवा का रुख बदल गया है। जो शोषित हैं वो भी सहनशीलता, त्याग और समर्पण की भावनाओ से अपने परिवार को पालती हैं।
कठिन से कठिन परिस्थितियों में हमारे गाँव की बहादुर नारियां मीलो दूर से पानी लाती हैं। खेतों में काम करती हैं, अपने बच्चो को ममत्व और परिवार को प्रेम और आदर देती हैं। क्या कहीं भी उन कर्मठ, सरल और मृदुभाषी नारियों को शिकायत करते देखा है? नही क्योंकि जहाँ कर्त्तव्य और भावनाएं दोनों का संगम है, वही है भारतीय नारी।
आज की भारतीय नारी हर क्षेत्र में उत्कृष्ट है। समाज परिवार से लेकर अंतरिक्ष तक भारत की मिट्टी की खुशबू हमे भारतीय नारी होने का सम्मान अनुभव करवाती है। कल्पना चांवला, सुनीता विलियम्स जहाँ भारत को ब्रह्मांड में पहुँचा कर आई है। जहाँ एक और वह पुरुष के कंधे से कंधा मिलाकर चल सकती है, वहीं पुरुष प्रधान क्षेत्र में भी अपनी जीत का ऐलान कर सकती है।
आज भारतीय नारी होने का गौरव मुझे यह हर्ष देता है कि इस सब्र में मैं भी एक हिस्सा हूँ। अपने इस अस्तित्व और प्रण के जरिये मै यह निरंतर कामना करती रहूंगी कि मेरी उन सभी बहनो ओर बेटियो को ईश्वर अपनी कृपा का पात्र बनाकर सत्कर्म, परिश्रम और प्रगति की राह दिखाये।
आज के आधुनिक युग मे इस सुकोमल और सुंदर कृति को सबल व सशक्त बनाना और भी अनिवार्य है। जो संघर्ष हमारी महान महिलाओं ने किए हैं उनको धूमिल किये बिना आइये, विश्व महिला दिवस पर भारतीय नारी की छवि को और अधिक गौरवान्वित करे क्यो कि परिवर्तन प्रकृति का नियम है।










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