कोरोना महामारी के कारण देश में चल रहे लॉकडाउन को लगभग 2 माह होने आये हैं। इन स्तिथियों ने सभी काम धंधे बंद होने से गरीब वर्ग के सामने अपने परिवार का पेट भरने का भी संकट खड़ा हो गया है। शासन ऐसे लोगों के लिए अपने स्तर पर योजनाएं चला रहा है, लेकिन फिर भी कई ज़रूरतमंद इन सुविधाओं से वंचित हैं और भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। ऐसे माहेश्वरी समाजजनों की मदद के लिए समाज का राष्ट्रीय संगठन अभा माहेश्वरी युवा संगठन मदद के लिए आगे आया है। युवा संगठन समाज के सहयोग से 3600 से अधिक परिवारों को 1500 रूपए की सहायता प्रदान की है।
कोरोना महामारी न सिर्फ हमारे देश अपितु सम्पूर्ण विश्व के लिए एक बहुत बड़ी विपदा बन गई हैं। इसका वर्तमान में कोई अधिकृत उपचार न होने से इससे बचाव ही एकमात्र रास्ता बचा है। इसके लिए विश्व के अधिकांश देश लोगों की जीवन रक्षा के लिये भारी आर्थिक हानि होने के बावजूद अपने यहाँ लॉकडाउन किये हुए हैं। इन देशों में हमारे देश में इस महामारी का संक्रमण तुलनात्मक रूप से कम होने के बावजूद जनहित में पूरे देश में सम्पूर्ण लॉकडाउन किया गया है। विकसित देश भी आर्थिक नुकसान से बचने के लिये जनता के जीवन को दाव पर लगाकर सम्पूर्ण लॉकडाउन से बचते रहें हैं, ऐसे में भारत जैसे विकासशील देश का यह प्रयास अपने-आपमें सम्पूर्ण विश्व के लिये सराहनीय बन चुका है। इसी का परिणाम है कि चाहे भारी आर्थिक हानि उठानी पड़ी हो, लेकिन भारत में अभी भी यह महामारी नियंत्रण में ही है।
संकट में फसे कई माहेश्वरी परिवार:
वर्तमान में चल रहे इस राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन ने आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के सामने तो भीषण चुनौती ही खड़ी कर दी है। सभी प्रकार के काम-धंधे बंद होने से न सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति कमज़ोर हुई है, बल्कि उनके सामने तो परिवार का पेट भरने की भी अत्यंत विकट चुनौती खड़ी हो गई है। सरकार इस स्थिति में समाज के आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिये राहत योजनाएँ चलाकर उन्हें आर्थिक तथा खाद्यान्न व राशन आदि की सहायता प्रदान कर रही है। हमारा माहेश्वरी समाज एक गरिमामय समाज है। अतः कई समाजजन अपने स्वाभिमान के कारण इस प्रकार का लाभ लेने में हिचकिचाते हैं। इसी प्रकार कई समाजजन सिर्फ तात्कालिक रूप से ही अपने काम-धंधे बंद होने से इस आर्थिक संकट में आये हैं। ऐसे लोग इस लॉकडाउन में भारी परेशानी का सामना कर रहें हैं। उनके लिये भी चुनौती आर्थिक स्थिति को संभालना तो दूर अपने परिवार की उदरपूर्ति भी एक चुनौती बन गई है।
युवा संगठन ने समझी इन ज़रूरतमंदों की परेशानी:
युवा संगठन राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार कालिया व राष्ट्रीय महामंत्री आशीष जाखोटिया इस विपदा की घड़ी में हर संभव सहयोग करने हेतु तत्पर रहे हैं। संपूर्ण भारतवर्ष में अनेक स्थानों पर युवा संगठन एवं समाज बंधुओं द्वारा जरूरतमंदों की हर संभव सहायता की जा रही है। अत: अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी युवा संगठन ने न सिर्फ समझा अपितु पूरी संवेदना के साथ महसूस भी किया। संगठन ने देखा कि माहेश्वरी समाज के अनेक परिवार इस लोकडाउन की स्थिति में काफी प्रभावित हुए हैं और वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं, तो ऐसे माहेश्वरी परिवारों की आर्थिक सहायता करने का राष्ट्रीय युवा संगठन ने बीड़ा उठा लिया। इसके लिये युवा संगठन ने समाज के सहयोग से एक राहत कोष का गठन किया और इसके माध्यम से ऐसे जरूरत मंद परिवारों को 1500 रूपये प्रति परिवार आर्थिक सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया गया। जैसे ही यह योजना तैयार हुई, इसे समाज ने भी भरपूर सहयोग प्रदान किया। इसका नतीजा यह है कि अभी तक 4000 से अधिक जरूरतमंद माहेश्वरी परिवारों ने इसके लिये आवेदन किया है और इनमें से 3600 से अधिक परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान कर राशि उनके बैंक खाते में संगठन द्वारा जमा की जा चुकी है और शेष आवेदकों की सहायता राशि भी शीघ्र ही जमा कर दी जाऐगी।
ऐसे प्रदान की गई सहायता:
युवा संगठन द्वारा संचालित इस सहायता में ऐसे जरूरतमंद परिवारों के स्वाभिमान की रक्षा के लिये इनका नाम गुप्त रखा गया है और सहायता राशि सीधे उनके बैंक खाते में ही जमा की गई। यह सहायता एक परिवार में केवल एक को ही दी गई तथा शर्त रखी गई आवेदक के परिवार में कोई सरकारी सेवा में कार्यरत नहीं हो। जरूरतमंद परिवारो ने अपने आवेदन के साथ अपना आधार कार्ड की कॉपी व बैंक खाते का विवरण या कैंसिल चेक की कॉपी प्रेषित की। आवेदक द्वारा दिये गये बैंक खाता में ही खाद्य सामग्री हेतु 1500 रुपए की राशि जमा कराई गई।
अन्य संगठनों के लिए भी बना प्रेरणा:
अ.भा. माहेश्वरी युवा संगठन द्वारा लॉकडाऊन के दौरान जरुरतमंदों के लिये जो यह सहायता योजना संचालित की जा रही है, इसकी सर्वत्र सराहना हो रही है। इसकी उपयोगिता और इसके महत्व को देखते हुए देश कई प्रदेश तथा जिला संगठनों ने भी अपने स्तर पर ऐसी ही योजना तैया कर जरूरतमंद समाजजनों के लिये सहायता भी प्रारम्भ कर दी है। इतना ही नहीं इसे जिसने भी जाना वह सराहे बिना न रह सका, जिसका नतीजा यह है कि इसकी सफलता को देखते हुए विभिन्न वैश्य व अन्य सामाजिक संगठनों ने भी इसी प्रकार की योजना तैयार की है।
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