चाहे आप एलोवेरा को पहचानते न हों, लेकिन इसका नाम नहीं सुना हो, ऐसा हो नहीं सकता। एलोवेरा एक ऐसी वनस्पति है, जिसका नाम हजारों वर्षों से चमत्कारिक औषधि के रूप में लिया जाता रहा है। आईये जानें क्या है, एलोवेरा और क्यों मानी जाती रही है चमत्कारिक।
क्या है एलोवेरा:
एलोवेरा उत्तरी अफ्रीका की मूल प्रजाति का पौधा है। यह बहुत ही छोटे/नाटे तने वाला 30-36 इंच तक बढ़ने वाला पौधा है। जो शाखाओं व अंकुरित जड़ों द्वारा फैलाता है। यह विश्वभर में सूखे तथा गर्म इलाकों में पाया जाने वाला पौधा है जो कैक्टस के पौधे जैसा नजर आता है,
लेकिन कैक्टस प्रजाति का नहीं है, बल्कि लीली प्रजाति का पौधा है। नमी की बर्बादी को रोकने के लिए तने के छेदों को बंद करके ये पौधा तब भी नम रहता है जिन परिस्तिथियों में दूसरे पौधे सूख/मुरझा जाते हैं।
पूरी तरह से उगे हुए पौधे की लंबाई 30-36 इंच तक की है और पूरी तरह से पके हुए पौधे के पत्ते की चौड़ाई 2 से 3 इंच तक चौड़ी होती है और इसका वजन लगभग 2 किलो के आसपास होता है। एलोवेरा की संरचना चार परतों में होती है। छाल होती है अंदर कड़वे तरल की परत होती है जो पौधे की पशुओं से रक्षा करने करती है। इसके अंदर श्लेष्म होता है।
कई दुर्लभ पोषक तत्वों का खजाना:
एलोवेरा की 300-400 तरह की प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से अधिकतर में बहुत थोड़े से औषधी गुण पाए जाते हैं। कुछ प्रजातियां जहरीली भी होती हैं। इनमें सबसे अच्छी प्रजाति एलोबार्बाडेंसीस मिलर है जो ‘बेस्ट एलोवेरा’ है। इसमें 275 पोषक तत्व पाए जाते हैं जो मनुष्यों के लिए फायदेमंद होते हैं।
एलोवेरा का अंदरुनी हिस्सा, काटकर काटलियां बनाकर एलोवेरा जेल बनाया जाता है। एलोवेरा में वो आवश्यक 8 एमिनोएसिड होते हैं। जिनकी इंसानों को जरूरत होती है, लेकिन शरीर उसे बना नहीं सकता है।
कैसे काम करता है एलोवेरा:
दो क्षेत्रों प्रभाव दिखाता है यानी इम्यून सिस्टम व एपिथिलियल टीशूस यपर। यह भरपूर पौष्टिक सम्मिश्रण की तरह काम करता है। जो अलग-अलग तत्वों के लेने से कहीं अधिक लाभकारी होता है। इसका कारण यह है कि ये सम्मिश्रण एक प्रकार से सामूहिक रूप से काम करते हैं। जिससे एक-दूसरे के गुण में वृद्धि होती है जिसे सिनेर्जीज्म कहते हैं। इसमें एदेप्तोजेनिक गुण होते हैं।
इसका अर्थ यह है कि हर व्यक्ति वह तत्व ले लेता है जो उसके लिए जरूरी है। अतः हर व्यक्ति पर इसका लाभ अलग-अलग होता है। एलोवेरा में कई ऐसे विशेष गुण हैं जो शरीर के कोमल तत्वों को हानि नहीं पहुंचने देता और यदि होती भी है तो उसकी भरपाई करने में मदद करता है। कुछ तो दूषित तत्व हमारा शरीर खारिज करता है और कुछ जो बाहरी प्रदूषण से पैदा होते हैं, एलोवेरा इस तरह के तत्वों को नष्ट करता है।
इन दूषित तत्वों से बुढ़ापा जल्दी आता है और बीमारियों को भी जन्म देता है। एलोवेरा हमारे शरीर की सभी छोटी बड़ी नस की सफाई करता है और कोशिकाओं में नवीन शक्ति और स्फूर्ति पैदा करता है।
क्या आप जानते हैं कि आज ज्यादातर बीमारियों का कारण आतों का साफ न होना होता है? और एलोवेरा हमारी इन आतों में जमे मल को साफ करके इनको शक्ति देता है। हमारा शरीर छोटे-छोटे सेल से बना हुआ है और छोटे-छोटे सेल मिलकर टिश्यू बनते हैं। यह टिश्यू से ऑर्गन से सिस्टम और सिस्टम से मिलकर ह्यूमन बॉडी बनती है।
बॉडी का सबसे छोटा हिस्सा सेल है। एलोवेरा जैल इन छोटे-छोटे हिस्सों को एक्टिव करता है और शरीर के इन छोटे-छोटे हिस्सों में जमा टॉक्सिन को सफलतापूर्वक बाहर निकालता है। फलस्वरूप हमें कई प्रकार की बीमारियों से छुटकारा मिलता है। हम अपने शरीर को साफ रखने के लिए रोज नहाते हैं, जिससे हमारे शरीर के ऊपर की गंदगी साफ हो जाती है।
क्या आपने कभी सोचा है कि हम बाहर से रोज नहाते हैं पर हमें कभी अंदरुनी सफाई भी करनी चाहिए। यदि हां तो हमारे पास अंदरुनी सफाई के लिए एलोवेरा जैल है। यह हमारे शरीर की अंदरुनी सफाई करता है और हमारी आंतें धीरे-धीरे साफ होने लगती हैं। एक नई शक्ति का संचार होता है।










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