छोटा सा अंगूर, शक्ति भरपूर

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अंगूर स्वस्थ मनुष्यों के लिए पौष्टिक भोजन और रोगी के लिए शक्तिप्रद होने के साथ ही सारे भारत में आसानी से उपलब्ध फल है। इसमें विटामिन सी तथा ग्लूकोज़ पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। यह शरीर में खून की वृद्धि करता है और कमज़ोरी को दूर करता है।

यही कारण है कि जिन बड़े-बड़े भयंकर एवं जटिल रोगों में किसी प्रकार का कोई पदार्थ खाने-पीने को नहीं दिया जाता है उनमें डॉक्टरों द्वारा मरीजों को अंगूर या दाख खाने की सलाह दी जाती है।


अंगूर का फलों में बहुत महत्त्व है क्योंकि इसमें शक्कर की मात्रा अधिक और ग्लूकोज़ के रूप में होती है। ग्लूकोज़ रासायनिक प्रक्रिया का नतीजा होने के कारण शरीर में तुरंत सोख लिया जाता है। इसलिए अंगूर खाने के बाद आप तुरंत स्फूर्ति अनुभव करते हैं।

यह विटामिनों का भी सर्वोत्तम स्त्रोत है। इसमें एक विशेष यह भी है कि यह शरीर में मौजूद विषैले तत्वों को आसानी से शरीर से बाहर निकाल देता है। यह एक अच्छा रक्त शोधक व रक्त विकारों को दूर करने वाला फल है।


अंगूर सेवन के फायदे

अंगूर
  • यदि किसी ने धतूरा खा लिया हो तो उसे अंगूर का सिरका दूध में मिलकर पिलाने से काफी लाभ होता है। यह मियादी बुखार, मानसिक परेशानी, पाचन में गड़बड़ी आदि में काफी लाभकारी है।
  • जिन माताओं को पर्याप्त दूध न उतरता हो, उनके लिए भी इसका सेवन लाभकारी होता है।
  • इसकी बेल काटने से जो रस निकलता है, वह त्वचा रोगों में लाभकारी होता है।
  • दमे में इसे खाना बहुत लाभदायक है। यदि थूकने में रक्त आता हो तब भी इसे खाने से लाभ होता है।

  • ह्रदय रोगी के ह्रदय में जब दर्द हो और धड़कन अधिक हो तो अंगूर का रस पीने से दर्द बंद हो जाता है तथा धड़कन सामान्य हो जाती है। रोगी को आराम आ जाता है तथा रोग की आपात स्थिति दूर हो जाती है।
  • इसे खाने से घबराहट दूर हो जाती है।
  • दांत निकलने के समय बच्चों को अंगूर का दो चम्मच रस पिलाते रहने से दांत सरलता और शीघ्रता से निकल आते हैं, बच्चा रोता नहीं है। हंसमुख व सुडौल रहता है। सूखे का रोग नहीं होता है। इसे बच्चों को दौरे नहीं पड़ते और चक्कर भी नहीं आते।
  • सौ ग्राम अंगूर नित्य खाते रहने से मासिक धर्म नियमित रूप से आता है।
  • अंगूर की बेल के 30 ग्राम पत्तों को पीसकर, पानी मिलाकर, छानकर, नमक मिलाकर पीने से गुर्दे के तड़पते रोगी को आराम मिलता है।

अंगूर
  • यक्ष्मा, खांसी, जुकाम, दमा आदि के लिए अंगूर बहुत अच्छा है।
  • नियमित अंगूर खाने से घाव शीघ्र भरते हैं।
  • सिगरेट, चाय, कॉफ़ी, जर्दा, शराब की आदत केवल अंगूर खाते रहने से छूट जाती है।
  • नित्य कम से कम 50 ग्राम अंगूर खाते रहने से बार-बार जुकाम लगना बंद हो जाता है।
  • इसे गर्म पानी से धोकर खाने से चेचक में लाभ होता है।
  • मिर्गी के रोगियों के लिए अंगूर खाना बहुत लाभदायक होता है।
  • अंगूर का रस एक कप नित्य प्रातः सूर्योदय से पहले पीने से आधे सिर का दर्द ठीक हो जाता है।

  • ताजे अंगूरों का रस कमज़ोर रोगी के लिए लाभदायक है। यह रक्त बनाता है और रक्त पतला करता है, शरीर मोटा करता है। दिन में दो बार नित्य इसका रस पीने से पाचन शक्ति ठीक होती है, कब्ज दूर होती है, वायु संचय नहीं होती। यह जल्दी पचता है, इससे दुर्बलता दूर होती है।
  • इसे खाने से फेफड़ों को शक्ति मिलती है। जुकाम, खांसी दूर होती है। कफ बाहर आ जाता है। इसे खाने के बाद पानी न पीएं।

Sri Maheshwari Times
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