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खुशियों की पगडंडियों से

आप हमेशा यही सुनते आये होंगे, बचपन से आपको यही सीख देकर डराया और समझाया गया होगा कि राह जिंदगी की कितनी कठिन और जटिल है। यदि तुम जीवन में कुछ बनना चाहते हो, जिंदगी अच्छे से गुजारना चाहते हों तो कठिन परिश्रम करना होगा। बचपन से खूब पढ़ाई करनी होगी, स्कूल की अन्य गतिविधियों में हिस्सा लेना होगा, कॉलेज में पूरा ध्यान केवल उच्च शिक्षा पर लगाना है जिससे कैंपस में तुम्हारा प्लेसमेंट हो जाये।

नौकरी में बहुत मेहनत करनी है जिससे तुम्हें जल्द ही आगे बढ़ने का मौका मिले। ढेर सारे पैसे कमाओ जिससे घर, गाड़ी, बैंक बेलेंस बना सको और अपने बच्चों की अच्छी परवरिश कर सको। आपकी पूरी जिंदगी इन चीजों को पाने में खप जाती है। जिंदगी भर इन दो तीन बड़ी चीजों को पाने की लालसा में छोटी-छोटी खुशियों का आनंद उठाना आप जानते ही नहीं। जिंदगी कब गुजर गई इसका अहसास भी नहीं हुआ। कुछ बड़ी खुशियाँ मिली भी होंगी परंतु वह उतना लंबा आनंद नहीं दे पाईं जितनी लंबी जिंदगी उन्हें पाने की चाहत में हमने तिल-तिल कर पीस डाली। लिखने का अभिप्राय यह नहीं है कि जिंदगी में बड़ी सफलताओं, बड़ी जरूरतों को पाने का लक्ष्य नहीं होना चाहिए। तात्पर्य मात्र ये है कि तलवार की चाह में सूर्य की अवहेलना नहीं करना चाहिये?

बड़े को पाने की चाह में जिंदगी को बोझिल और जटिल मत बनायें। हर पल आनंद बटोरते चलें। उस आनंद को अपने अंदर महसूस करें। हृदय का ये आनंद मस्तिष्क को उर्वर बनायेगा, शरीर को स्फूर्त करेगा, मन उत्साहित होगा और इन तीनों का मेल बड़ी खुशियों और सफलताओं को पाने में सबसे बड़ा मददगार बनेगा।

इसलिए जिंदगी में छोटी-छोटी खुशियों के पल ढूंढिये। उन्हें जी भर कर जीइये, उसके आनंद को दिल की गहराईयों में महसूस कीजिये। ये खुशियां आपकी जब आदत बन जायेगी तो आप पायेंगे कि धीरे-धीरे ये आपकी ताकत बन जायेगी और बड़ी खुशियों को पाने की राह को भी तुलनात्मक आसान बना देगी।

ये खुशियाँ कैसे ढूंढे? इनके लिये बहुत पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं है बस अपनी जीवनचर्या में छोटे-छोटे परिवर्तन कर दिलो दिमाग से इसकी तैयारी कर अपने आपको इन्हें पाने का अवसर खुद ही बनाते रहें।

सुबह उठते ही आनंद उठाने के अवसर खोजते रहें। बिस्तर पर उठते ही अपने आप से वायदा करें कि आप आज बहुत सारी खुशियाँ बटोरेंगे। चाय की चुस्कियों में, नहाने के पानी में, नाश्ते के स्वाद में, तैयार होकर अपने घर से स्कूल या ऑफिस के रास्ते में, दोस्ती की गपशप या संगीत की धुन में, स्कूल आफिस के यार दोस्तों में, गॉसिप चाय या फिर काम को पूरा करने में, समय पर आने की खुशी, जल्द घर पहुंचने की खुशी, परिवार संग बतियाने की खुशी, टीवी प्रोगाम देख ठहाके लगाने की खुशी। व्हाटसेप, इंस्टा, रील में खुशी, अच्छा पढ़ने की खुशी, बाहर खाने की खुशी, अनजानों से मिलने की खुशी’ अपने हिस्से की खुशियाँ, छोटी-छोटी खुशियाँ- अपने आप बटोरने की आदत बनाइयें। ये छोटी खुशियाँ ही ‘‘राह जिंदगी की’’, को बड़ा खुशनुमा बना देंगी।