योग मुद्रा वह है, जो जीव की किसी भी अवस्था में की जा सकती है और चमत्कारिक लाभ देती है। इस श्रृंखला में प्रस्तुत है, उषा मुद्रा (Usha Mudra) जो जीवन से आलस्य को दूर कर ऊर्जा का संचार करती है।

उषा मुद्रा एक योग मुद्रा है। उषा का अर्थ है ‘भोर’ यानी सुबह। यह मुद्रा सूर्य के गुणों को दर्शाती है और मन और दिल को रोशन करती है। यह मुद्रा ध्यान के दौरान एक नया संकल्प, एक नई शुरुआत करने में मदद करती है। यह अंधकार के बाद होने वाली रोशनी का भी प्रतीक है। अगर सुबह उठने में परेशानी होती है या आलस बहुत ज्यादा आता है, निष्क्रियता अथवा सुस्ती जैसी परेशानी से जूझ रहे हैं, तो यह मुद्रा बेहद फायदेमंद है। उषा मुद्रा, मानव शरीर में मौजूद स्वाधिष्ठान चक्र को जागृत कर देती है। यह चक्र सृजनात्मकता, कामुकता और रचनात्मकता से जुड़ा है और आपमें इन गुणों से जुड़ी ऊर्जा को स्वस्थ करती है। तनाव और चिंता को कम करना, नींद में सुधार करना, और ऊर्जा बढ़ाना, इसे ‘ब्रेक-ऑफ-डे’ मुद्रा के रूप में भी जाना जाता है।
कैसे करें: आरामदायक स्थिति में बैठ जाएं। दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसा लें। हथेलियों की दिशा ऊपर की ओर रखें। दाएं हाथ का अंगूठा बाएं हाथ के अंगूठे के ऊपर रखकर हल्का सा दबाव बनाएं। जिन लोगों को सवेरे उठने में आलस्य महसूस होता है, वे सुबह उठते ही इस मुद्रा को बनाकर हाथ सिर के नीचे रखते हुए 5-6 बार धीमी-गहरी-लंबी सांस के साथ आंखों और मुख को खोलें। दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसा लें।
क्या है इसके लाभ: यह चेतना और जागरूकता को बढ़ाती है व स्पष्टता, ज्ञान, और चेतना की उच्च अवस्था प्राप्त होती है। यह ऊर्जा का विकास करती है। मानव शरीर में मौजूद स्वाधिष्ठान चक्र को संतुलित करती है। यह सृजनात्मकता, कामुकता, और रचनात्मकता से जुड़ी ऊर्जा को स्वस्थ करती है। हार्माेन प्रणाली संतुलित रहती है। हार्माेनल असंतुलन के सभी पीड़ित अंतःस्रावी तंत्र के लाभों को प्राप्त करते हैं। स्वस्थ मासिक धर्म चक्र बनाए रखने में यह मदद करती है। यह सुबह उठने में परेशानी या आलस की समस्या को दूर करती है व चुस्ती-फूर्ति लाती है।










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