कोरोना से अधिक खतरनाक इसका भय

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कोरोना महामारी का जब प्रारंभ हुआ तभी से इसे मौत की लाइलाज बीमारी के रूप में प्रचारित किया जाता रहा है। इसका असर सबसे अधिक मनोवैज्ञानिक रूप से हुआ है। अब तक इसकी जितनी भयावहता सामने आयी है, वास्तव में इससे नहीं, इसके भय के कारण लोग इससे ज्यादा समस्याग्रस्त हुए हैं। सार मे कहें तो कोरोना से अधिक खतरनाक इसका भय है।

जैसा कि आप सभी जानते हैं, हम इस समय अपने जीवन काल की सबसे बड़ी समस्या कोरोनावायरस महामारी की चपेट में है। यह समय ऐसा है कि सभी लोग ज्यादातर समय सिर्फ इसी बीमारी के बारे में चर्चा कर रहे हैं। हम सभी ने बहुत समय लॉकडाउन में रहकर अपने-अपने घरों में बिताया है। यह समय सभी के लिए बहुत कठिन साबित हुआ है।

यह देखने में आ रहा है कि कोरोनावायरस महामारी की वजह से जाने-अनजाने में सभी के मन में डर वाली भावना उत्पन्न हो गई है। इस डर का एक मुख्य कारण है कि इस वायरस से संबंधित बहुत ज्यादा अफवाह और गलत खबरों का प्रचार-प्रसार हो गया है। इस तरह की खबरों से हमें इस महामारी से अपनी लड़ाई में बहुत बाधाएं प्राप्त हुई है।

कई लोगों में इस विषय से संबंधित डर ने मानसिक समस्याओं जैसे कि घबराहट, बेचैनी, अवसाद, नींद की समस्याएं, अत्यधिक चिंता करना,शक करना, आदि को जन्म दिया है।

अब मानसिक तनाव से भी जंग:

इसके अलावा काम के अभाव की वजह से,काम में नुकसान होने के डर से अपनी नौकरी खोने के डर से और अपने भविष्य को लेकर चिंताओं के कारण सभी लोगों को बहुत ज्यादा मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा है। परंतु जैसा कि आप सभी जानते हैं कि हम सभी के जीवन की रक्षा के लिए और इस महामारी से बचने के लिए सरकार ने यह लॉकडाउन लगाया था और हम सभी की यह जिम्मेदारी बनती थी कि हम नि:स्वार्थ होकर इस लॉक डाउन का और इन परिस्थितियों में अपनी सरकार का पूर्णत: समर्थन करते, जो हमने किया।

इसी के साथ अब धीरे-धीरे जब लॉकडाउन खत्म हो रहा है तो हमारा डर और भी बढ़ रहा है क्योंकि अभी तक इस वायरस से लड़ने वाली दवाई हमें नहीं मिली है। इस महामारी को लेकर जो डर हमारे मन में पैदा हो गया है, उसके लिए बहुत जरूरी है यह जानना कि हमें अपने और अपने परिवार की रक्षा स्वयं करनी है। उसके लिए सरकार द्वारा प्रदान किए गए नियम और कानून का सही तरीके से पालन करना है।

इसमें मास्क लगाना, सोशल डिस्टेंसिंग, सही समय पर और सही तरीके से हाथ धोना, एवं अपने कार्यस्थल पर बरती जाने वाली सावधानियों का पालन करना आदि आते हैं।

अब रचनात्मकता की ओर बढ़ाऐं कदम:

अपने शरीर को मजबूत करने के लिए कम से कम आधे घंटे रोज़ व्यायाम करना भी बहुत जरूरी है। कोरोना संबंधित डर को भगाने के लिए कोशिश करें कि सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स से दूर रहें और उन पर फैलाई जाने वाली अफवाहों से बचे रहें। दिन में एक ही बार न्यूज़ को देखें या न्यूज़ पेपर पढ़ें।

अपने आप को रचनात्मक कार्यों के लिए प्रोत्साहित करें और अपने परिवार के सदस्यों के साथ एक अच्छा समय बिताने का प्रयत्न करें। कोरोना संबंधित सभी जानकारियों के लिए प्रशासन द्वारा दी गई वेब साइट्स को ही फॉलो करें। अगर किसी को मानसिक समस्याओं से तकलीफ बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं तो अपने डॉक्टर या किसी मनोचिकित्सक से संपर्क करें ताकि उस समस्या का समय रहते निदान हो जाए।

इस संदर्भ में वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए ज्यादातर डॉक्टर ऑनलाइन कंसल्टेशन के माध्यम से सभी जरूरतमंदों को अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। मेरा मानना यह है कि इस महामारी से बचने के साथ इस महामारी के डर से बचना भी इस समय हमारे लिए अति आवश्यक है।

मैं सभी से यह प्रार्थना करता हूं कि बिना किसी डर के इस कठिन समय में एकजुट होकर इस समस्या का सामना करें।

डॉ. श्रीमित माहेश्वरी
(लेखक ख्यात कंसलटेंट साइकैटरिस्ट हैं।)

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