हमारे माहेश्वरी परिवार के बच्चों को परीक्षाओं के लिये शुभकामना। क्लासरूम के अंदर जो पढ़ाया गया, ट्यूशन क्लासों में जो रटाया गया और परिवार में अच्छे नंबर लाने के लिये जो डराया गया, उसकी परीक्षा और उस परीक्षा का परिणाम तो कुछ समय में आपके हाथों में होगा, उसका असर क्षणिक होगा, वह आपको जीवन के सफर में एक सीढ़ी ऊपर चढ़ा देगा। शैक्षणिक व्यवस्था के व्यवहारिक परिणामों को देखते हुए आप भी ‘आगे पाठ पीछे सपाट’ की राह पकड़ लेंगे।

जबाबदार पालकों और प्यारे बच्चों कक्षीय पढ़ाई के साथ-साथ बहुत जरूरी है कि हम अपना बहुमुखी विकास करें। शैक्षणिक योग्यता के साथ इतर कलाओं में भी पारंगत हों या उनकी थोड़ी बहुत जानकारी और उनमें दखल अवश्य हासिल करें। अप्रैल का महीना है, प्राय: सभी बच्चों और किशोरों को लंबे अवकाश मिलेंगे।
साल भर तो आप स्कूल पढ़ाई, ट्यूशन क्लास, टेस्ट, ट्यूटोरियल में व्यस्त रहते हैं उस पर स्कूल क्लासेस, पालकों का प्रेशर आपको अन्य गतिविधियों की ओर अग्रसर नहीं होने देता पर ये समय पूर्णत: आपका है, इसका सदुपयोग कीजिये।
आप कहेंगे क्या करें, कैसे करें
- आपने देखा है और आपको आदत भी है कि स्कूल में आपकी पढ़ाई टाइम टेबल के अनुसार होती है। आप भी पूरी छुट्टियों का इस तरह टाइम टेबल बनायें।
- खेल खेलने को अपने जीवन में और इस खाली समय में सबसे पहले स्थान देवें। खेल खेलने के अनेकों फायदे हैं। सर्वप्रथम तो इससे निर्मल आनंद की प्राप्ति होती है, ये शारीरिक विकास का सबसे महत्वपूर्ण जरिया है, साथ ही आजकल थोड़ी सी बात पर बच्चों के ऊपर होने वाले मानसिक प्रभाव यथा इनफीरियरटरी कॉम्पलेक्स, टेंशन, डिप्रेशन से भी राहत मिलती है।
- आर्ट ऑफ रीडिंग और आर्ट ऑफ लिसनिंग को जाने, समझे और नियमित रूप से दिनचर्या में अपनाएं बिना व्यक्तित्व विकास असंभव है। अब तो ये सुविधा आपको घर बैठे मिल रही हैं। व्हाटसप के आधे अधूरे ज्ञान को छोड़कर अच्छी किताबें पढ़ें या ऐप के माध्यम से नियमित सुने।
- कलात्मकता जीवन को सुंदर और चरित्र को उदत्त बनाती है। इन छुट्टियों में इन कलाओं को विकसित कीजिये। नृत्य संगीत, ड्रामा, डिबेट, मोनोएक्टिंग, डांगि हैंडी क्राफ्ट कौशल को आरंभ करवायें। फिर जिसमें बच्चे की रुचि और संभावनायें दिखें उसमें आगे बढ़ायें।
- हार्ड स्किल तो स्कूल कॉलेज सिखा देते हैं। प्राय: इसके लिये बाहर से लोग खरीद भी लेते हैं परंतु जो सॉफ्ट स्किल हैं जो जीवन में सफलता के लिये बहुत आवश्यक है वह बाजार में बिकते भी नहीं और एक दिन में सीखे भी नहीं जा सकते। छुट्टियों में बच्चे अधिक समय आपके पास रहेंगे, उनमें इन गुणों का विकास करना पालकों, परिवारजनों और सामाजिक संस्थाओं की जवाबदारी है।










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